जितेंद्र ने रचा इतिहास, दिव्यांग क्रिकेट टीम में चयन से जिले का नाम किया रोशन

जितेंद्र ने रचा इतिहास, दिव्यांग क्रिकेट टीम में चयन से जिले का नाम किया रोशन


सीवान जिले के बड़हरिया प्रखंड के छोटे से गांव तिनभेरिया कला निवासी जितेंद्र कुमार यादव ने अपनी मेहनत, जज़्बे और आत्मविश्वास के बल पर कर दिखाया है, जो लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है. एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद जितेंद्र का चयन भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में हुआ है. यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और गांव, बल्कि पूरे सीवान जिले और बिहार के लिए गर्व का विषय है.

जितेंद्र को 11 दिसंबर को भारतीय दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, रांची में रिपोर्ट करने के लिए बुलाया गया था, जहां से उन्हें नेपाल के खिलाफ होने वाली अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया। खास बात यह है कि इस टीम में पूरे बिहार राज्य से मात्र दो दिव्यांग खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिसमें सीवान के जितेंद्र कुमार यादव भी शामिल हैं.

बचपन से क्रिकेट के प्रति जुनून
जितेंद्र को बचपन से ही क्रिकेट से खास लगाव रहा है. गांव के खेत-खलिहानों और खाली मैदानों में दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और शारीरिक दिव्यांगता के कारण उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा. समाज की तानेबाजी और लोगों की नकारात्मक सोच ने कई बार उन्हें तोड़ने की कोशिश की, लेकिन जितेंद्र ने कभी हार नहीं मानी है.जब उन्हें यह जानकारी मिली कि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, तब से उन्होंने पूरी लगन और अनुशासन के साथ अभ्यास शुरू कर दिया. कठिन परिश्रम का ही नतीजा रहा कि उन्होंने राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा.

गांव और परिवार में खुशी की लहर
जितेंद्र के चयन की खबर मिलते ही तिनभेरिया कला गांव में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्य भावुक हैं. गांव के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं. बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि जितेंद्र ने यह साबित कर दिया है कि संसाधनों की कमी और शारीरिक बाधाएं, मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं पातीं है.

आवश्यक सुविधाएं कराई जाएंगी मुहैया
जिला दिव्यांग क्रिकेट बोर्ड की उपाध्यक्ष शबनम परवीन ने जितेंद्र के चयन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जितेंद्र का चयन जिले, क्षेत्र और पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में साहस और संघर्ष से यह मुकाम हासिल किया है. हम क्षेत्रीय लोगों से चर्चा कर उन्हें खेल के लिए आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे. हमें पूरा विश्वास है कि जितेंद्र आगे चलकर देश और जिले का नाम रोशन करेंगे.

भारत का तिरंगा ऊंचा करना मेरा लक्ष्य
अपनी इस उपलब्धि पर भावुक होते हुए जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि टीम इंडिया में चयन होना मेरे बचपन का सपना था, जो आज पूरा हो गया है. दिव्यांगता के कारण कई बार निराशा हाथ लगी, लोग हंसते थे, लेकिन मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी है. अब मेरा लक्ष्य है कि मैं देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करूं और भारत का तिरंगा ऊंचा करूं. जितेंद्र की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक सशक्त संदेश है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं. उनका सफर साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं है



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