नेता प्रतिपक्ष का दावा: 13 सवालों के अफसरों ने नहीं दिए जवाब, पार्षद बोले-अपमान इतना, बस रोना बाकी – Gwalior News

नेता प्रतिपक्ष का दावा:  13 सवालों के अफसरों ने नहीं दिए जवाब, पार्षद बोले-अपमान इतना, बस रोना बाकी – Gwalior News



शहर की हालात में बिगाड़ने वाले नगर निगम के अफसर पार्षदों द्वारा पूछे सवालों के जवाब तक नहीं दे रहे है। 11 दिसंबर को निगम परिषद के सचिव ने 7 पार्षदों के 13 सवाल आयुक्त संघ प्रिय को पहुंचाए थे। परिषद में भी बे​फ्रिक अफसरों ने पार्षदों के सवालों के जवाब

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शुक्रवार को निगम परिषद के साधारण सम्मेलन के दौरान आयुक्त संघ प्रिय के नहीं आए। वहीं जिम्मेदार अफसरों की कुर्सियां खाली पड़ी होने पर पार्षद विफर गए। विपक्ष ही नहीं सत्ता पक्ष के पार्षदों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि सवालों के जवाब क्यों नहीं आए। ये तो परिषद के बेइज्जती है। जब आयुक्त नहीं हैं, तो परिषद चलाने का मतलब नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष हरीपाल ने कहा कि 3 साल में 215 ठहराव परिषद से किए गए। उसमें से सिर्फ 15 पर कार्रवाई हुई। 200 ठहरावों को कार्रवाई का इंतजार है। सड़कें खराब, उड़ती धूल, बहता सीवर जैसे आम लोगों के जुड़े सवालों के जवाब भी अफसर नहीं दे रहे हैं। अब तभी परिषद चलाई जाए, जब इनके जवाब मिल जाए। आखिर में सभापति मनोज तोमर ने सत्ता-विपक्ष के पार्षदों की बात सुनकर परिषद को 22 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी।

जल विहार स्थित निगम परिषद के भवन में सभापति ने एजेंडे पर चर्चा कराने को कहा। तभी विपक्ष के पार्षदों ने स्थगन पढ़ाकर चर्चा करने की बात कही। सत्ता पक्ष भी इस पर राजी हो गया। सभापति ने सचिव बृजेश श्रीवास्तव से स्थगन प्रस्ताव पढ़ने के निर्देश दिए। पिछले दिनों ही आयुक्त संघ प्रिय ने बैठक लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के परिषद की बैठक में पहुंचने के निर्देश दिए थे लेकिन आयुक्त के नहीं रहने पर वह भी नहीं आए। ।

आयुक्त नहीं आए, हंगामें के बाद परिषद 22 तक स्थगित

7 पार्षदों के 13 सवाल, जिन पर परिषद स्थगित हुई

  • मनोज राजपूत:पहला सवाल जोन-3 के अधीन सीवर के काम की जानकारी मांगी। दूसरा सवाल वार्ड-8 में नई सीवर लाइन के स्वीकृत कार्य की जानकारी मांगी।
  • मीरा राजपूत: पहला-वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 में खेल स्पर्धाओं पर खर्च राशि का ब्यौरा मांगा। दूसरा सवाल-सामुदायिक भवनों से निगम को कितना राजस्व मिल रहा है।
  • देवेंद्र राठौर:पहला सवाल-2022 से 2025 तक सीवर सफाई में कहां से कितनी सिल्ट निकली। उसका डिस्पोजल कहां किया। उस पर खर्च राशि और माप पुस्तिका विधानसभा वाइज मांगी। दूसरा सवाल-निगम में कितने किराए के वाहन लगे हैं। उनका नंबर, मालिक का नाम।
  • महेंद्र आर्य: पहला सवाल-दो वित्तीय वर्ष में पार्कों मेंर कितनी राशि खर्च हुई। दूसरा-लेखा शाखा ने 2 साल में सड़क निर्माण पर कितना भुगतान किया।
  • नागेंद्र सिंह राणा:15वें वित्त के अंतर्गत कहां पर काम हुए। दूसरा सवाल-होर्डिंग लगाने की निविदा में चिह्नित स्थानों की सूची,होर्डिंग की सूची दी जाए।
  • मोहित जाट: रोड मेंटेनेंस के नाम पर विभागों से प्रतिमाह कितनी राशि खर्च की गई। दूसरा सवाल 2 साल में कार्यशाला से रोज कितने वाहनों पर कितना डीजल दिया जा रहा है। वाहनों के नंबर दिए जाएं।
  • बृजेश श्रीवास: साल 2024-25, 2025-26 में निगम ने नो पार्किंग जोन से रोज कितने वाहन उठाए और उनसे कितनी राशि वसूली। 2 साल में गौशाला पर कुल खर्च की राशि दी जाए।
  • भगवान सिंह: कार्यशाला में 3साल में कितने वाहन खरीदें। वे कहां पर चल रहे हैं।

ये है स्थगन प्रस्ताव

  • परिषद स्थगित करने के लिए सभापति से हाथ जोड़ते हुए पार्षद।
  • पार्षद आशा चौहान-रास्तों पर गेट बनाए गए है। इससे सड़कें सकरी हो गई है। इससे जाम लगता है।
  • पार्षद भावन कन्नोजिया- पार्किंग के ठेके नहीं किए गए। इन पर जनता से अवैध वसूली हो रही है।
  • पार्षद यामिनी परांडे- मौलिक निधि से महापुरुषों की प्रतिमाएं लगाई जाएं।
  • पार्षद अनिल सांखला-वार्ड-50 में अटल गैलरी का लोकार्पण कराया जाए।
  • पार्षद नागेंद्र सिंह राणा: आउटसोर्स के माध्यम से मैन पावर की मियाद वृद्धि 28 फरवरी 2025 तक की गई थी। इसके बाद 10 महीने बीत गए। बिना सक्षम स्वीकृति के भुगतान कैसे किया जा रहा है।
  • पार्षद भगवान सिंह- निगम की आय में वृद्धि के लिए निगम स्वामित्व की संपत्तियों को किराए पर देने के ​संबंध में।

आयुक्त व अफसरों के नहीं आने पर क्या बोले पार्षद

  • पार्षद मनोज राजपूत: परिषद से कप्तान और उनकी टीम गायब है। 3 साल अपमान में निकल गए। बस आंसू ही नहीं आ रहे।
  • पार्षद अपर्णा पाटिल: आयुक्त नहीं आए। हम जनता की पीड़ा किसे सुनाएं। ऐसी परिषद चलाने का कोई औचित्य नहीं है।
  • पार्षद नागेंद्र राणा: आयुक्त और अधिकारी पत्रों को गंभीरता से नहीं ले रहे है। आयुक्त के आदेश को अधिकारी नहीं मान रहे है।
  • पार्षद बृजेश श्रीवास: शहर की स्थिति भयावह बनी है। परिषद में दोनों जिम्मेदार नहीं है। वे अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे है।
  • पार्षद मोहित जाट: अफसर सवालों के जवाब नहीं दे रहे है। इसमें हमारी बेइज्जती है।

सभापति ने प्रभारी आयुक्त से जवाब देने को कहा

पार्षदों की नाराजगी देख सभापति ने प्रभारी आयुक्त मुनीष सिंह सिकरवार से पूछा कि पार्षदों ने सवाल लगाए थे। परिषद में उनके जवाब क्यों नहीं आए। प्रभारी आयुक्त (अपर आयुक्त) मुनीष सिंह सिकरवार ने जवाब देते हुए कहा कि पिछले सप्ताह छुट्टियां होने के कारण देर हुई है। हालांकि कुछ जवाब आ गए है। इसलिए सोचा था कि सभी के जवाब आने पर परिषद में रखे जाएं।



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