फूलगोभी की खेती में लगी गजब बीमारी, पौधे के पत्ते बड़े-बड़े पर फूल गायब! इस तरीके से बचेगी फसल

फूलगोभी की खेती में लगी गजब बीमारी, पौधे के पत्ते बड़े-बड़े पर फूल गायब! इस तरीके से बचेगी फसल


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Cauliflower Farming: उद्यान अधिकारी के अनुसार तापमान, सिंचाई और पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ने पर पौधे केवल पत्तियां बढ़ाते हैं. 10 से 25 डिग्री तापमान, हल्की सिंचाई और संतुलित खाद से अच्छी पैदावार मिल सकती है. इसके अलावा, बेहन बुवाई के लिए भी कुछ जरूरी टिप्स जानें…

Phool Gobhi Kheti: मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सर्दियों के मौसम में फूलगोभी एक प्रमुख नकदी फसल मानी जाती है. बाजार में सालभर इसकी मांग बनी रहती है, लेकिन सर्दी के मौसम में कई किसानों को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है. खेतों में पौधे तो अच्छे से बढ़ रहे हैं, पत्तियां भी हरी-भरी दिखाई दे रही हैं, लेकिन फूलगोभी का मुख्य हिस्सा यानी फूल या तो बन ही नहीं रहा या फिर बहुत छोटा रह जा रहा है. अगर आपके साथ भी ये दिक्कत है तो यहां एक्सपर्ट से समाधान जानें…

सीधी में ग्रामीण उद्यान अधिकारी सत्यनारायण सिंह ने लोकल 18 को बताया, फूलगोभी एक बेहद नाजुक फसल है, जिसका विकास पूरी तरह मौसम, सिंचाई और पोषक तत्वों के संतुलन पर निर्भर करता है. यदि इनमें से किसी एक में भी गड़बड़ी होती है तो पौधा पूरी ऊर्जा पत्तियों की वृद्धि में लगा देता है. फूल बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है. फूलगोभी के लिए आदर्श तापमान 10 से 25 डिग्री के बीच होना चाहिए. यदि तापमान 25 डिग्री से ऊपर चला जाए या 10 डिग्री से नीचे गिर जाए तो फूल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है.

ये स्थितियां फूलगोभी के लिए नुकसानदायक
सिंचाई को लेकर कहा, खेत में हमेशा हल्की नमी बनी रहनी चाहिए. अत्यधिक पानी भराव या लंबे समय तक सूखी मिट्टी, दोनों ही स्थितियां फूलगोभी के लिए नुकसानदायक हैं. किसानों को सलाह दी गई कि वे हल्की-हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि नमी बनी रहे और जड़ें स्वस्थ रहें. सत्यनारायण सिंह के अनुसार, मिट्टी में बोरॉन, कैल्शियम या नाइट्रोजन की कमी होने पर फूल फटने लगते हैं या उन पर काले धब्बे पड़ जाते हैं. उन्होंने संतुलित खाद देने की सलाह देते हुए बताया कि प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश देना लाभकारी है. साथ ही 1 प्रतिशत बोरॉन के घोल का छिड़काव भी काफी असरदार रहता है.

एक्सपर्ट ने आगे कहा, बहुत जल्दी या बहुत देर से रोपाई करने पर भी फूल बनने में दिक्कत आती है. क्षेत्र और किस्म के अनुसार रोपाई का समय तय करना जरूरी है. उदाहरण के तौर पर गोंडा क्षेत्र में सितंबर से नवंबर के बीच रोपाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है. सही समय, संतुलित पोषण और उचित सिंचाई अपनाकर किसान फूलगोभी की बेहतर पैदावार और गुणवत्ता दोनों हासिल कर सकते हैं.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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फूलगोभी खेती में लगी गजब बीमारी, पौधे के पत्ते बड़े-बड़े पर फूल गायब! जानें बचाव



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