डिंडौरी जिले के मेहदवानी इलाके के सरकारी स्कूल के पास अपनी छत न होने के कारण बच्चे घास की झोपड़ी में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत भोड़ा साज के नेटी टोला में स्थित प्राथमिक स्कूल का अपना भवन एक साल पहले तक था।
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लेकिन वह इतना जर्जर और खतरनाक हो चुका था कि एसडीएम के आदेश पर उसे गिरा दिया गया। प्रशासन ने पुरानी इमारत तो तोड़ दी, लेकिन बच्चों के बैठने के लिए कोई दूसरा इंतजाम नहीं किया। इसका नतीजा यह है कि अब स्कूल एक कच्ची झोपड़ी में चल रहा है।
ठंड और धूप में पढ़ाई करने की मजबूरी
इस स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल 37 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक प्रकाश राज ने बताया कि भवन न होने के कारण ग्रामीणों की मदद से स्कूल परिसर में ही एक झोपड़ी बना ली गई है। कड़ाके की ठंड के कारण बच्चे झोपड़ी के अंदर नहीं बैठ पाते और उन्हें बाहर धूप में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
चौथी क्लास की छात्रा मालती ने भी अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि बारिश और ठंड में बहुत दिक्कत होती है, अगर स्कूल बन जाए तो बड़ी राहत मिलेगी।
ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई नहीं
गांव के रहने वाले दीनदयाल ने बताया कि वे स्कूल की समस्या को लेकर कई बार बड़े अधिकारियों के पास जा चुके हैं। जुलाई 2025 में जनसुनवाई में भी आवेदन दिया गया और जिला शिक्षा विभाग (डीपीसी) को भी पूरी बात बताई गई, लेकिन अभी तक भवन बनाने को लेकर कोई जवाब नहीं मिला है।
बजट मिलने का इंतजार
जिला समन्वयक (डीपीसी) श्वेता अग्रवाल का कहना है कि जिले के सभी जर्जर और खराब हो चुके स्कूलों की जानकारी मुख्यालय भेज दी गई है। जैसे ही सरकार से पैसा (बजट) मिलेगा, वैसे ही नए भवनों का निर्माण और मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल बच्चे और ग्रामीण इसी उम्मीद में हैं कि जल्द ही स्कूल की नई बिल्डिंग बन जाएगी।