पुरानी रजाई लाओ-नई ले जाओ! देने होंगे सिर्फ 300 रुपये, दूर-दूर से आ रहे लोग

पुरानी रजाई लाओ-नई ले जाओ! देने होंगे सिर्फ 300 रुपये, दूर-दूर से आ रहे लोग


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Sidhi News: मोहम्मद गुलजार ने लोकल 18 को बताया कि फटी या पुरानी रजाई और गद्दों में नई रूई भरकर दोबारा इस्तेमाल लायक बना दिया जाता है. सबसे पहले पुरानी रूई को बाहर निकाला जाता है. मशीन से रूई की छंटाई की जाती है.

सीधी. मध्य प्रदेश में कड़कड़ाती ठंड पड़ रही है. तापमान में लगातार गिरावट के चलते रजाई, कंबल और गद्दों की मांग तेजी से बढ़ी है. ठंड से बचाव के लिए जहां लोग नई रजाइयां खरीद रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग पुरानी रजाइयों और गद्दों की मरम्मत कराने दुकानों तक पहुंच रहे हैं. आमतौर पर लोग हर साल खराब या फटी रजाइयों को फेंक देते थे और उन्हें नई रजाई खरीदनी पड़ती है, जिससे बजट बिगड़ जाता है लेकिन अब इसका सस्ता और टिकाऊ विकल्प सामने आया है. सीधी जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र में मात्र 300 रुपये में पुरानी रजाई को नई जैसी बना दिया जा रहा है.

रामपुर नैकिन के बघबर तिराहे पर स्थित दुकानों में सुबह से शाम तक रजाई और गद्दों की मरम्मत का काम चल रहा है. सर्दी शुरू होते ही लोग बाजारों की ओर दौड़ते हैं लेकिन नई रजाई की कीमतें एक हजार रुपये से शुरू होने के कारण कई लोग पुरानी रजाई को ही नया रूप दिलवाना बेहतर समझ रहे हैं.

मशीन से होती है रूई की छंटाई
रजाई का व्यापार करने वाले मोहम्मद गुलजार ने लोकल 18 से कहा कि फटी या पुरानी रजाई और गद्दों में नई रूई भरकर दोबारा उपयोग लायक बना दिया जाता है. इसके लिए सबसे पहले रजाई की पुरानी रूई को बाहर निकाला जाता है. इसके बाद मशीन के जरिए रूई को अलग-अलग किस्मों में छांटा जाता है. जो रूई उपयोग लायक होती है, उसे दोबारा तैयार किया जाता है जबकि खराब रूई से तकिए बना दिए जाते हैं.

एक घंटे में नई रजाई तैयार
उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद आवश्यकतानुसार रूई को चादर में भरकर दबाया जाता है और फिर सिलाई करके रजाई को नया आकार दिया जाता है. पूरी प्रक्रिया में करीब एक घंटे का समय लगता है. मोहम्मद गुलजार के अनुसार, रजाई या तकिया तैयार करने की मेहनत के 300 रुपये लिए जाते हैं. यदि ग्राहक अतिरिक्त नई सामग्री या कपड़े का उपयोग कराता है, तो उसका अलग से शुल्क लिया जाता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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