बेटे को भारत नहीं आने देंगे…डर से रिटायर्ड प्रोफेसर ने 28 दिन में 50 ट्रांजेक्शन किए, 1 करोड़ 34 लाख गंवाए

बेटे को भारत नहीं आने देंगे…डर से रिटायर्ड प्रोफेसर ने 28 दिन में 50 ट्रांजेक्शन किए, 1 करोड़ 34 लाख गंवाए


Ratlam News: मध्य प्रदेश के रतलाम में एक रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट के बहाने 28 दिनों तक ब्लैकमेल कर 1 करोड़ 34 लाख रुपये की ठगी की गई. पढ़े-लिखे बुजुर्ग को फर्जी कॉल्स, गिरफ्तारी की धमकियां और कनाडा में रहने वाले बेटे को भारत न आने देने का भय दिखाकर बदमाशों ने पूरा खेल रचा. पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया. ठगी का तरीका हैरतअंगेज था. जानें कैसे 28 दिन तक चला ये खेल…

ठगी का सिलसिला 28 सितंबर 2025 से शुरू हुआ. प्रोफेसर को अचानक एक फर्जी कॉल आई. उसमें खुद को साइबर क्राइम सेल का अधिकारी बताने वाले बदमाश ने कहा कि उनके नाम से जारी सिम का इस्तेमाल मुंबई के केनरा बैंक में 247 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है. प्रोफेसर का आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज उसी खाते से जुड़े बताए गए. इनकार करने पर गिरफ्तारी वारंट जारी होने और तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी गई.

ऐसे किया डिजिटल अरेस्ट
फिर, बदमाशों ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस स्टेशन का सेटअप दिखाया. यूनिफॉर्म वाले ‘अधिकारी’, हथकड़ियां और कागजातों का ढोंग देख प्रोफेसर हक्के-बक्के रह गए. ये सब दिखाकर बदमाशों ने उनको ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा, यानी घर से बाहर न निकलने, किसी से बात न करने और हर निर्देश मानने का आदेश दिया.

प्रोफेसर ने 50 ट्रांजेक्शन किए
बदमाशों की चालाकी यहीं खत्म नहीं हुई. उन्होंने प्रोफेसर के कनाडा में रहने वाले बेटे को निशाना बनाया. फर्जी कॉल्स में कहा गया कि बेटे को वीजा रद्द कर दिया जाएगा और कभी भारत लौटने न दिया जाएगा. इससे प्रोफेसर डर गए. बदमाशों ने दैनिक वीडियो कॉल्स पर ‘अपडेट’ देते रहे, ‘केस सेटलमेंट’ के नाम पर छोटी-छोटी रकम मांगते गए, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई. प्रोफेसर ने परिवार के नाम से लोन, म्यूचुअल फंड्स बेचे और दोस्तों से उधार लिया. कुल 1.34 करोड़ रुपये के 50 से ज्यादा ट्रांजेक्शन किए.

किराए के खातों में लेनदेन
ये सारे लेनदेन किराए के खातों में हुए. ये खाते बिहार, जबलपुर, भोपाल और जामनगर के लोगों के नाम से थे. फिर गुजरात के एकाउंट से क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर कंबोडिया शिफ्ट कर दिया गया. असम में बदमाशों ने ऑपरेशन कंट्रोल रूम चलाया, जबकि कश्मीर और अहमदाबाद से लॉजिस्टिक सपोर्ट मिला. सोशल मीडिया से जुड़े इस नेटवर्क ने प्रोफेसर को मानसिक रूप से तोड़ दिया, वे रात-दिन डरे रहते, बिना सोचे पैसे ट्रांसफर करते.

जब बेटा कनाडा से आया…
बेटा जब कनाडा से रतलाम लौटा, तो हकीकत खुली. लगातार ट्रांजेक्शन देखकर उसने पिता से सवाल किए. प्रोफेसर ने आंसुओं में सारी कहानी सुनाई. बेटे ने माता-पिता संग थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया. साइबर सेल ने तुरंत ट्रांजेक्शन ट्रेस किए. एसपी अमित कुमार ने बताया, “यह डिजिटल अरेस्ट का नया रूप है. हमने 14 लाख फ्रीज करवाए और बिहार, जबलपुर, भोपाल, जामनगर से 11 गिरफ्तारियां कीं. नेटवर्क कंबोडिया तक फैला था.”



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