राज्यपाल आरिफ मोहम्मद वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए: जबलपुर में कहा- दुनिया के खून-खराबे के लिए हम खुद जिम्मेदार; शांति संदेश नहीं दे पाए – Jabalpur News

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए:  जबलपुर में कहा- दुनिया के खून-खराबे के लिए हम खुद जिम्मेदार; शांति संदेश नहीं दे पाए – Jabalpur News


जबलपुर के मानस भवन में चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का आज आखिरी दिन है। आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पहुंचे। उन्होंने रामायण के महत्व, भारतीय संस्कृति पर बात की। मीडिया से वार्ता के दौरान बा

.

संतो को चरणस्पर्श कर दीप प्रज्ज्वलित किया

रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल होते ही राज्यपाल का राम राम के भजन से स्वागत किया गया। उन्होंने मंच पर विराजे संत कल्याणदास जी महाराज के चरण स्पर्श किए। इसके बाद सभी ने राष्ट्रगान गया। राज्यपाल मोहम्मद आरिफ ने संतों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा, सभी का धन्यवाद किया। विदेशों के आए डेलीगेट्स को कहा, हिंदी में बोलने जा रहा हूं। कुछ समझ न आए तो हाथ उठाइएगा। मैं इंग्लिश में भी समझाऊंगा। आपका स्वागत है।

उन्होंने कहा हमारी संस्कृति में सत्संग की अपनी महिमा है। इस सत्संग में मुझे न्योता दिया मैं आभारी हूं। राम चरित मानस के तुलसीदास जी की चौपाई है,

नवधा भक्ति कहउँ तोहि पाहीं; सावधान सुनु धरु मन माहीं॥ प्रथम भक्ति संतान हा कर संगा, दूसरी रति मम कथा प्रसंगा।।

QuoteImage

राज्यपाल ने कहा कि, इस चौपाई से तुलसीदास ने सत्संग की महिमा को बखान किया है। श्रीमदभगवद्गीता का श्लोक बोलते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से आध्यात्मिक चर्चा में भाग लेने वालों का बखान किया था। उन्होंने आदिगुरु शंकराचार्य की भज गोविंदा रचना का भी जिक्र किया। सत्संग के वैराग्य, वैराग्य से विवेक, विवेक से स्थिर तत्व ज्ञान उत्पन्न होता है। तत्व ज्ञान से ही जीवन मुक्ति मिलती है। लिबरेशन फॉर्म ह्यूमन कंडीशन।

उपनिषद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- उपनिषद में एक उपदेश है जिसमें बताया गया है कि ऐसी कौन सी चीज है जिससे हम वास्तविक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा ‘को लाभो गुणी संगम ‘ गुणी लोगों के साथ सत्संग करना चाहिए। मेरा मानना है कि भारत का धर्म ही आध्यात्मिकता है।

दुनिया में हर कोई अपने आप को सुपीरियर मानता है

दुनिया में हर किसी को शांति चाहिए। लेकिन शांति हमारे हाथ नहीं लगती। इतिहास पर नजर डालें तो हर वक्त ऐसे लगता है जैसे इंसान का खून बहुत सस्ता है। ये खून खराबा पूरे इतिहास में नजर आता है। साल 1948, हमारे देश के आजाद होने के एक साल बाद यूनाइटेड नेशन की मानव अधिकारों को लेकर उद्घोषणा सामने आई। हमारे संविधान में भी हमने उस शब्दावली का प्रयोग किया। जितने मानव अधिकार हैं वो एक परिकल्पना से निकलते हैं और वो हैं मानव की प्रतिष्ठा। मानव के नाते प्रतिष्ठा का अधिकारी है। ये बात 1948 में पूरी दुनिया ने स्वीकार की। हर कोई अपने आप को सुपीरियर मानता था। मैं सही हूं बाकी सब गलत। मेरी आस्था सही बाकी सब गलत।

हमारी संस्कृति आदर सम्मान पर ही आधारित है। हमारी आत्मा ही अध्यात्म है। प्रभु श्री राम भारत की एकात्मकता का प्रतीक हैं। वेदों उपनिषदों तमाम ग्रंथों और जो शक्तियां मानव को प्रदान की गई हैं उससे ये समझा जा सकता है कि परमात्मा आत्मा के रूप में हर किसी के हृदय के निवास करता है। इसका मतलब देहो देवालया। यानी हर शरीर मंदिर है। इसीलिए हर किसी का सम्मान होना चाहिए। ये हमारी संस्कृति से हमें मिला है। हमें एकात्म पर पर फोकस करने की जरूरत है उसी से एकता का एहसास होगा। ये हमारी हजारों साल पुरानी संस्कृति है। ये सब बातें राज्यपाल ने वेदों उपनिषदों और उनके तमाम श्लोकों का जिक्र करते हुए कहीं।

बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या निंदनीय

कार्यक्रम से बाहर निकलने के बाद बिहार राज्यपाल ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा मेरा मानना है कि दुनिया में जो खूनखराबा हो रहा है ये इसलिए हो रहा है कि हमने सैद्धांतिक रूप में मानवता प्रतिष्ठा को स्वीकार कर लिया है। हजारों साल से हमारी संस्कृतियां ऐसे परिभाषित हुई हैं कि मैं तुमसे बड़ा हूं। तुम मेरे से छोटे। मेरा तुम पर प्रभुत्व होना चाहिए। दुनिया में अकेली ऐसी संस्कृति भारत की संस्कृति है जिनके आधारभूत स्तंभ रामचरित मानस, गीता, वेद उपनिषद हैं। जिनमें ये कहा गया है कि किसी भी दूसरे व्यक्ति के अंदर दिव्यता देखो। जब भी मैं आपके अंदर दिव्यता देखूंगा तो मैं आपसे नाराज भी हूंगा तो आपके पैर पे पैर नहीं रखूंगा। यही एक तरीका है।

एक सख्त बात आप सबके बीच कहूंगा कि दुनिया में जो खून खराबा हो रहा है हम भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं इसलिए जिम्मेदार हैं क्योंकि स्वामी विवेकानंद कहते थे भारत के पास एक बड़ा शांति और एकात्म का संदेश है दुनिया को देने के लिए लेकिन हम ऐसा करने में सफल नहीं हो पाए।

बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या और उनपर हिंसा वाले सवाल पर राज्यपाल ने कहा, ये निंदनीय है। इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है। लेकिन बुनियादी तौर पर ये शब्दावली इंपॉर्टेंट है। क्योंकि ऐसी शब्दावली हमदर्दी बांट देती है। ये मानव संवेदना और मानवीय करुणा का मामला है।



Source link