बालाघाट. केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय की थी. बीते एक साल में सुरक्षाबलों की कार्रवाई काफी तेज रही. नतीजतन नक्सलियों को अपनी जान गवानी पड़ी, तो टूटते हौंसले ने उन्हें सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया है. नतीजतन 35 साल माओवाद के साये में रहे बालाघाट को तय डेडलाइन से पहले ही मुक्ति मिल गई. इस साल बालाघाट में रिकार्ड 13 हार्डकोर नक्सलियों ने सरेंडर किया है.
अब पुलिस ने दावा किया है बालाघाट पूरी तरह से नक्सल मुक्त हुआ है. पुलिस ने नक्सलियों की निशानदेही पर करीब 6 डंप रिकवर किए, जिनमें घातक हथियार, नक्सली साहित्य सहित अब तक सबसे बड़ी कैश रिकवरी हुई है.
बालाघाट के जंगल नक्सलियों के लिए सेफ जोन
बालाघाट नक्सलियों का सेफ जोन रहा करता था. ऐसे में नक्सली यहां के जंगलों में कई चीजें डंप करके रखते थे. ऐसे में नक्सलियों के सरेंडर करने के इतने दिनों बाद भी कई संवेदनशील चीजें दफन करके रखा है. ऐसे में बालाघाट की धरती में नक्सलियों के कई राज दफन है. लोकल 18 की बातचीत में एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्श कांत शुक्ला ने बताया कि अब पहले की तरह अब सर्चिंग जारी है. वहीं, जहां नक्सली सक्रिय थी वहां पर सैनिटाइज किए जा रहे है. अब तक कई डंप भी मिले है. वहीं, सरेंडर नक्सलियों से पूछताछ के लिए दूसरे राज्यों की टीमें आ रही है. इसके अलावा सेंट्रल एजेंसियां आकर उनसे पूछताछ कर रहे है.
हाल ही में मिला नक्सलियों का बड़ा जखीरा
नक्सलियों ने दुगलाई के जंगलों में बम और विस्फोटक सामग्री छिपा रखी थी. यह इलाका अमानला कैंप से लगभग 1.6 किलोमीटर दक्षिण दिशा में यह डंप मिला है. दुगलाई क्षेत्र नक्सलियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. सुरक्षाबलों को यह इनपुट इंटेलिजेंस से मिला था. ऐसे में 123 बटालियन ने अभियान शुरू किया, जिसमें उन्हें भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिली.
अब जानिए क्या-क्या मिला
सर्चिंग के दौरान जवानों को कई विस्फोटक सामग्री मिली है. यहां जवानों को मौके से 4 नग इलेक्ट्रोनिक डेटोनेटर, जिलेटीन राडएविस्फोटक पाउडर 375 ग्राम, 4 किलो एएनएफओ विस्फोटक, 5 नग फ्लैसिकबल ब्लास्टिंग वायर 40 फीट तांबे का तार 2 नग बैटरी 01 नग ड्रम लगभग 02 किलो कील, काली टोपी, 02 किलो कांच के टुकड़े और 02 टार्च बरामद किए.
इससे पहले भी मिल चुका बड़ा जखीरा
इससे पहले भी सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की निशानदेही पर कई डंप रिकवर किए है, जिसमें अलग-अलग जंगलों से सेमी ऑटोमेटिक रायफल, ग्रेनेड लॉन्चर, बोल्ट एक्शन राइफल, पंप एक्शन सिंगल शॉट राइफल, हैंडमेड देशी कट्टा, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, कारतूस, राइफल की मैगजीन , क्लेमोर माइंस पाईप, बारुद सहित कई विस्फोटक पदार्थ बरामद किए गए है. पुलिस ने नक्सलियों की निशानदेही पर सुरक्षाबलों ने 11 लाख 57 हजार 385 रुपए की रिकवरी की गई. वहीं, बंजीपार जंगल से पांच लाख आठ हजार 50 रुपए बरामद किए.
सरेंडर के बाद नक्सलियों पर तीन एफआईआर
नक्सलियों के सरेंडर के बाद पुलिस नक्सलियों की निशानदेही पर जंगल में डंप खोज रही है. ऐसे में जंगल से कई विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई है. ऐसे में सरेंडर नक्सलियों पर तीन एफआईआर दर्ज हुई है. पहली एफआईआर गढ़ी थाने में हुई है, जहां पर आयुध अधिनियम और विधि विरुद्ध क्रियाकलाप के मामले में अपराध पंजीबद्ध हुआ है.
दूसरी एफआईआर रूपझर थाने में हुई, जहां पर सीसी मेंबर रामधेर सहित 14 नक्सलियों पर विस्फोटक अधिनियम, विधि विरूद्ध क्रियाकलाप की संबंधित धाराओं में मामला पंजीबद्ध हुआ है. वहीं, हाल ही में बंजीपार के जंगल से मिले डंप मामले में 17 सरेंडर नक्सलियों पर मामला पंजीबद्ध हुआ है. अब इस पर पूर्व सांसद ने सवाल खड़े किए है. उनका कहना है कि जब नक्सलियों ने सरेंडर किया है, तो उन पर एफआईआर दर्ज नहीं करना चाहिए. सरकार नक्सलवाद खत्म नहीं करना चाह रही है और इसे बढ़ाना चाह रही है.