Last Updated:
Jabalpur News: थाईलैंड में रामायण को रामकियन कहा जाता है. जिसका अर्थ है राम कीर्ति. थाईलैंड के प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय प्रभाव देखा जा सकता है और थाई भाषा में भी कई संस्कृत शब्द मिलते है. उन्होंने बताया कि वे स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के माध्यम से वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस से जुड़े है. प्रभु श्री राम और माता सीता का प्रेम अद्भुत है. जिससे काफी कुछ सीखने को मिलता है.
थाईलैंड के कित्ती फांग न केवल थाई भाषा में बल्कि हिंदी में भी धाराप्रवाह बात करते है. वे थाईलैंड में छात्रों को हिंदी सिखाने का काम भी करते है और उनकी टीम ने भारतीय ग्रंथों का थाई भाषा में अनुवाद किया है. कित्ती फांग बताते हैं कि थाईलैंड की अपनी एक अलग रामायण है. जिसे रामकियन कहा जाता है.
लोकल 18 से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि वह चुलालूकोन यूनिवर्सिटी में हिंदी पढ़ाते है और इसलिए इंटरव्यू भी हिंदी में ही देते है. वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के लिए वे अपनी टीम के साथ हमेशा इंडिया आते है. भारतीय संस्कृति को जानना उनके लिए काफी रोचक है और इसी कारण वे इससे जुड़े हुए है. थाईलैंड में अधिकांश लोग भारतीय संस्कृति से प्रभावित है.
थाईलैंड में रामायण को रामकियन कहा जाता है. जिसका अर्थ है राम कीर्ति. थाईलैंड के प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय प्रभाव देखा जा सकता है और थाई भाषा में भी कई संस्कृत शब्द मिलते है. उन्होंने बताया कि वे स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के माध्यम से वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस से जुड़े है. प्रभु श्री राम और माता सीता का प्रेम अद्भुत है. जिससे काफी कुछ सीखने को मिलता है.
थाईलैंड के लोग विदेशी भाषा के रूप में हिंदी सीख रहे है. जो एक ऑप्शनल सब्जेक्ट है. भारत एक महान देश है और थाईलैंड में भी भगवान श्री राम और माता सीता को महसूस किया जा सकता है. थाईलैंड की प्राचीन राजधानी अयोध्या ही है. थाईलैंड में रामायण न केवल एक ग्रंथ है, बल्कि यह संस्कृति, कला और पहचान का अभिन्न अंग भी है. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सभी को कुछ न कुछ सिखाने के लिए प्रेरित करती है.