Indore News: इंदौर 130 साल से नल से पानी पीने वाला शहर, जानिए कैसे बिछाई गई थी पाइपलाइन

Indore News: इंदौर 130 साल से नल से पानी पीने वाला शहर, जानिए कैसे बिछाई गई थी पाइपलाइन


Last Updated:

Indore News: इंदौर नगर निगम देश के सबसे पुराने नगर निगमों में से एक है. यहां 1906 में ही पॉवर हाउस का निर्माण हो चुका था. उस समय ब्रिटिश शासन था. लेकिन इंदौर प्रिंसली स्टेट था. इसलिए प्रशासन और कर का काम होलकर ही देखते थे. 1916-17 के आसपास बिलावली तालाब बनकर तैयार हो चुका था. अंग्रेजों का उद्देश्य था कि प्रिंसली स्टेट तक पाइपलाइन पहुंच जाए.

आज इंदौर दूषित पानी की वजह से भले ही सुर्खियों में है. लेकिन यहां के लोग लंबे समय से नल का पानी पी रहे है. जब अन्य शहरों में यह एक कल्पना मात्र था. जब देश के बड़े शहरों में लोग कुओं और बावड़ियों पर निर्भर थे. तब इंदौर में पाइपलाइन से पानी घरों तक पहुंच रहा था. यहां नल से पानी पहुंचाने की नींव 1890 के आसपास पड़ी थी. जब महाराजा तुकोजीराव होल्कर का शासन था. उन्होंने महसूस किया कि केवल कुओं के भरोसे काम नहीं चलेगा और योजना बनाकर सबसे पहले शहर के पास बड़े बिलावली और सिरसपुर तालाब बनवाए, ताकि बारिश का पानी जमा किया जा सके.

इसके बाद शहर के बीचों-बीच ऊंचे पानी के टावर बनवाए गए ताकि प्रेशर के साथ हर मोहल्ले में पानी पहुंच सके. उस जमाने में बिछाई गई पाइपलाइनें इतनी मजबूत थी कि उनमें से कई आज भी काम कर रही है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया था कि गुरुत्वाकर्षण की मदद से पानी शहर की ओर आए जिससे बिजली का कम से कम इस्तेमाल हो.

इंदौर नगर निगम देश के सबसे पुराने नगर निगमों में से एक है. यहां 1906 में ही पॉवर हाउस का निर्माण हो चुका था. उस समय ब्रिटिश शासन था. लेकिन इंदौर प्रिंसली स्टेट था. इसलिए प्रशासन और कर का काम होलकर ही देखते थे. 1916-17 के आसपास बिलावली तालाब बनकर तैयार हो चुका था. अंग्रेजों का उद्देश्य था कि प्रिंसली स्टेट तक पाइपलाइन पहुंच जाए. लेकिन तुकोजीराव होल्कर ने इसे पूरे शहर के लिए उपलब्ध कराया. उन्होंने विश्व के प्रसिद्ध टाउन प्लानर पैट्रिक गेडेस को बुलाकर ड्रेनेज व्यवस्था से लेकर साफ-सफाई और पानी की निकासी का काम कराया.

1939 के बाद बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए यशवंत सागर तालाब का निर्माण किया गया और मॉडर्न इंजीनियरिंग की मदद से घर-घर नल का जल पहुंचाया गया. भविष्य की पानी की जरूरत को देखते हुए 1977 में नर्मदा नदी के जल को लाने के लिए पहले चरण का काम शुरू हुआ था. जब 500 मीटर नीचे से 70 किलोमीटर दूर से नर्मदा का पानी लाया गया. आज भागीरथपुरा, जूनी इंदौर समेत कई इलाकों में सालों पुरानी सीमेंट की पाइपलाइनें दुरुस्त की जाती है. यह वही शहर है जो उस समय से नल का पानी पी रहा है. जब यह अन्य शहरों के लिए केवल एक कल्पना मात्र था.

homemadhya-pradesh

इंदौर 130 साल से नल से पानी पीने वाला शहर, जानिए कैसे बिछाई गई थी पाइपलाइन



Source link