विराट कोहली पर लगाया आसान फॉर्मेट खेलने का आरोप, ODI में कैसा है संजय मांजरेकर का रिकॉर्ड?

विराट कोहली पर लगाया आसान फॉर्मेट खेलने का आरोप, ODI में कैसा है संजय मांजरेकर का रिकॉर्ड?


Sanjay Manjrekar ODI Stats: पूर्व भारतीय बल्लेबाज और क्रिकेट एक्सपर्ट संजय मांजरेकर एक बार फिर विराट कोहली की आलोचना कर फैंस के निशाने पर आ गए हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर कहा कि उन्हें दुख होता है जब वो जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन को टेस्ट में शतक बनाते देखते हैं और फिर सोचते हैं कि विराट कोहली इस फॉर्मेट से संन्यास ले चुके हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि कोहली क्रिकेट के तीनों प्रारूप से रिटायरमेंट लेते तो बात अलग थी, लेकिन उन्होंने आसान रास्ता चुना है.

संजय मांजरेकर की मानें तो ODI क्रिकेट टेस्ट और T20 की तुलना में सबसे आसान फॉर्मेट है. उन्होंने वीडियो शेयर कर कहा कि टेस्ट सबसे कठिन है और टी20 की भी अलग चुनौती है, लेकिन एकदिवसीय क्रिकेट सबसे आसान है. उन्होंने विराट कोहली का नाम लेकर उनकी आलोचना की है. बड़ा सवाल ये है कि जिस ODI क्रिकेट क सबसे आसान फॉर्मेट बताकर संजय मांजरेकर विराट कोहली की आलोचना कर रहे हैं, उसमें उनका रिकॉर्ड कैसा रहा है? आइए जानते हैं. 

संजय मांजरेकर ने ODI में क्या किया?

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भारत के पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर एक स्टाइलिश बल्लेबाज थे. उनके पिता विजय मांजरेकर भारतीय क्रिकेट में बड़ा नाम थे और उन्होंने 55 टेस्ट में प्रतिनिधित्व किया था. संजय ने 1987 में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया था. अगले साल यानी 1988 में उन्हें ODI खेलने का भी मौका मिला. संजय मांजरेकर ने भारत के लिए 74 ODI खेले और 33.23 की औसत से 1994 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने इस फॉर्मेट में सिर्फ एक शतक और 15 अर्धशतक जड़े. बात करें टेस्ट क्रिकेट की तो संजय मांजरेकर ने इस फॉर्मेट में 37 टेस्ट खेले और 37.14 की औसत से 2043 रन बनाए, जिसमें 4 शतक और 9 फिफ्टी शामिल है.

संजय मांजरेकर ने विराट कोहली पर क्या कहा?

अपने रुख को स्पष्ट करते हुए संजय मांजरेकर ने कहा कि अगर कोहली तीनों प्रारूपों से संन्यास ले लेते तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन जिस बात ने उन्हें हैरान कर दिया, वह यह थी कि कोहली ने ‘सबसे आसान प्रारूप’ वनडे को ही चुना, जबकि लाल गेंद वाले क्रिकेट में हो रही गलतियों को सुधारने से इनकार कर दिया. उन्होंने वीडियो में ये भी कहा कि कोहली टेस्ट में लगातार 5 सालों से संघर्ष कर रहे थे और उनका औसत 30.00 से भी कम था, लेकिन उन्होंने कभी गलती सुधारने की कोशिश नहीं की.



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