Balaghat: ढाई साल में बस इतना ही बना 19 करोड़ का पुल, अब और बढ़ गया समय, वजह जान आएगा गुस्सा

Balaghat: ढाई साल में बस इतना ही बना 19 करोड़ का पुल, अब और बढ़ गया समय, वजह जान आएगा गुस्सा


Balaghat News: मध्य प्रदेश के बालाघाट में विकास लगातार अपनी इबारत लिख रहा है. जिले में कई रेल्वे ओवर ब्रिज, सड़कें बन रही हैं. लेकिन, उन विकास कार्यों की रफ्तार धीमी है. इससे आम लोग का इंतजार और भी लंबा हो जाता है. एक ऐसा ही ब्रिज बालाघाट की जीवनदायिनी कही जाने वाली वैनगंगा नदी पर बन रहा है. यह पुल जागपुर को बालाघाट से जोड़ेगा. इससे आने वाले यात्रियों का समय बचेगा. ये ब्रिज बनने से 18 से ज्यादा गांव के लोगों का मुख्यालय आने का सफर आसान हो जाएगा.

जब कोई पुल या सड़क बनती है तो इलाके के लोगों को सहुलियत ही नहीं मिलती, बल्कि उस क्षेत्र के उद्योग धंधे भी रफ्तार पकड़ते हैं. वैनगंगा पर बने रहे इस पुल को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह रहा. लेकिन, अब वो उत्साह ठंडा होता जा रहा है. पुल की स्वीकृति मिली और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही भूमि पूजन हुआ. इसके बाद श्रेय लेने वालों की होड़ सी मच गई. पुल का काम भी तेजी से शुरू हुआ. लेकिन अब रफ्तार धीमी हो गई. ढाई साल से ज्यादा का समय बीत गया, पुल का काम पूरा नहीं हो सका है.

जानें कितना अहम है ये ब्रिज
इस ब्रिज की आस जागपुर सहित दर्जनों गांवों को दो दशक से आस थी. अब वह पूरी होती नजर आ रही है. अभी कई गांवों के लोगों को करीब दस किलोमीटर घूम कर बालाघाट शहर आना पड़ता है. लेकिन, ब्रिज बनने से यह सफर महज 4 किलोमीटर का रह जाएगा. ऐसे में इन इलाकों से बालाघाट में सब्जी बेचने या दूध बेचने वाले हर तरह के वर्ग को फायदा मिलेगा. इसके अलावा सैंकड़ों बच्चे शहर में स्कूल और कॉलेज आते हैं, उन्हें भी सुविधा मिलेगी. अस्पताल आने वालों को भी सहुलियत होगी.

जिसका पहले टेंडर रद्द, उसी कंपनी को फिर काम 
बालाघाट की वैनगंगा नदी पर बन रहे जागपुर पुल की लागत 19 करोड़ रुपए है. यह पुल करीब ढाई साल से बन रहा है, यानी निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है. इसके पीछे की वजह ठेकेदार की कार्यशैली है. दरअसल, मेसर्स अम्फ्रा स्ट्रक्चर को टेंडर मिला था. धीमी कार्यशैली की वजह से ठेकेदार का टेंडर रद्द हुआ था. लेकिन, फिर से उसी ठेकेदार को काम सौंप दिया गया है. ऐसे में अधिकारियों की कार्यशैली पर भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि ऐसी लापरवाह कंपनी को फिर से काम क्यों सौंपा गया?

आवाजाही में रही परेशानी
लोकल 18 ने इसी इलाके से आने-जाने वाले लोगों से बातचीत की. उन्होंने बताया कि काम की गति धीमी है. इस पुल का सालों से इंतजार कर रहे हैं और फिर से धीमी गति की वजह से इंतजार बढ़ गया है. इसके अलावा निर्माणाधीन ब्रिज के पास से लोग आवाजाही कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. मामले में लोकल 18 ने मेसर्स अम्फ्रा स्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट मैनेजर से बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि काम में तेजी लाई जा रही है. समय पर पूरा करने की कोशिश की जा रही है.

जून तक काम पूरा करने की मोहलत
कलेक्टर मृणाल मीना ने जिले में बन रहे पुल और आरओबी की समीक्षा बैठक ली. इसमें अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि जागपुर में बन रहा ब्रिज जून 2026 तक बन जाए. लेकिन, जिस तरह से ब्रिज का काम चल रहा है, वह बेहद धीमी गति है. अब देखना होगा कि काम समय पर होगा या नहीं.



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