Devdutt Padikkal vs Mayank Agarwal: कर्नाटक रणजी क्रिकेट टीम ने अचानक से कप्तानी में बड़ा बदलाव कर दिया. उसने अनुभवी मयंक अग्रवाल से टीम की कमान वापस ले ली है और युवा खिलाड़ी देवदत्त पडिक्कल पर विश्वास जताया है. कर्नाटक ने पंजाब के खिलाफ अंतिम लीग मैच से ठीक पहले यह फैसला लिया और सबको चौका दिया. यह मैच पंजाब के मोहाली जिले में स्थिति मुल्लांपुर में 29 जनवरी को शुरू होगा.
मयंक कप्तानी से OUT, केएल राहुल टीम में IN
मयंक की कप्तानी तो चली गई है, लेकिन वह टीम में अपनी जगह बचाने में कामयाब हो गए हैं. उनके साथ-साथ भारत के अनुभवी खिलाड़ी केएल राहुल और प्रसिद्ध कृष्णा का भी सेलेक्शन हुआ है. जनवरी 2025 में हरियाणा के खिलाफ खेलने के बाद यह राहुल का पहला रणजी मैच होगा. मयंक को कप्तानी से हटाए जाने पर किसी को ज्यादा हैरानी नहीं हुई. यह कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन का जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है.
इस एक हार ने सबकुछ पलटा
दरअसल, मध्य प्रदेश से करारी हार के बाद कर्नाटक की नॉकआउट की उम्मीदें बहुत कम रह गई थीं, ऐसे में यह कदम किसी सीनियर बल्लेबाज पर भरोसा खोने के बजाय एक बड़े बदलाव को दिखाता है. इसीलिए यह बदलाव अब मायने रखता है और यह कर्नाटक के वर्तमान से ज्यादा उसके भविष्य के बारे में बताता है. मयंक का फॉर्म उतन अच्छा नहीं रहा है और साथ ही टीम के प्रदर्शन में भी गिरावट आई है.
कर्नाटक का रणजी में गजब इतिहास
कर्नाटक क्रिकेट टीम सिर्फ कोई आम रणजी टीम नहीं है. वे इस टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक हैं. उसने 2013-14 और 2014-15 में लगातार खिताब जीतने के बाद 2014-15 में तमिलनाडु को हराकर आखिरी बार ट्रॉफी जीती थी. उस दौर ने कर्नाटक को घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन का पैमाना बनाया था. तब से उम्मीदें बहुत ज्यादा रही हैं. 2025-26 सीजन में कर्नाटक ग्रुप बी में 21 पॉइंट्स के साथ महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद तीसरे स्थान पर था. अलूर में मध्य प्रदेश से हार सिर्फ एक हार नहीं थी, बल्कि यह एक ऐसा झटका था जिसने बल्लेबाजी की कमजोरी, लीडरशिप पर दबाव और टैक्टिकल सुस्ती को उजागर किया.
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मयंक की क्या गलती?
मयंक अग्रवाल अनुभवी हैं और इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं. वह घरेलू क्रिकेट में एक जाने-माने खिलाड़ी हैं, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बता रहे थे. वह मौजूदा रणजी सीजन में नौ पारियों में 33.11 की औसत से 298 रन ही बना पाए. इसमें एक शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं. यह प्रदर्शन कई खिलाड़ियों के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन उस ओपनर के लिए नहीं जिस पर लीडरशिप की जिम्मेदारी हो और जिससे हर पारी में टीम को अच्छी शुरुआत देने की उम्मीद हो.
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मयंक हुए फेल तो गई कप्तानी
मध्य प्रदेश के खिलाफ मैच में कर्नाटक दो बार लड़खड़ाया. अग्रवाल दोनों पारियों में जल्दी आउट हो गए, जिससे मिडिल ऑर्डर दबाव में आ गया और कप्तान को खुद पर दबाव होने के बावजूद बॉलिंग में बदलाव और फील्डिंग सेट करनी पड़ी. ओपनर्स के लिए कप्तानी दोधारी तलवार की तरह है. आप पहले बैटिंग करते हैं और अक्सर सबसे ताजा गेंदबाजों के सामने होते हैं. अगर आप फेल होते हैं, तो बाकी मैच में आप मानसिक दबाव में रहते हैं. कर्नाटक की सेलेक्शन कमेटी ने साफ तौर पर यह नतीजा निकाला कि इस बोझ की वजह से अग्रवाल रन नहीं बना पा रहे थे.
देवदत्त पडिक्कल का चयन क्यों?
पहली नजर में इस सीजन में पडिक्कल के रणजी आंकड़े कप्तानी के लायक नहीं लगते. उन्होंने सिर्फ दो मैच खेले हैं. चार पारियों में 27.75 की औसत से 111 रन बनाए हैं. मध्य प्रदेश के खिलाफ वह दोनों पारियों में शून्य पर आउट हुए थे. कप्तानी पिछले मैच के प्रदर्शन का इनाम नहीं है. यह भरोसे, स्वभाव और भविष्य की वैल्यू का संकेत है. पडिक्कल की हालिया व्हाइट-बॉल फॉर्म को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता. विजय हजारे ट्रॉफी में वह नौ पारियों में 725 रन बनाकर दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे. उनका औसत 90.62 का था. इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि उन्होंने कंट्रोल, धैर्य और स्थिति की समझ के साथ बैटिंग की. ये ऐसे गुण हैं जिन्हें सेलेक्टर्स लीडरशिप की तैयारी से जोड़ते हैं. कर्नाटक के थिंक-टैंक ने एक ऐसे खिलाड़ी को देखा जो लय में था. पडिक्कल को लंबी अवधि के लिए कप्तान बनाया गया है.