खंडवा की वो रहस्यमयी जगह, जहां नागदेवता आज भी विराजमान, लोगों की आस्था का केंद्र बना

खंडवा की वो रहस्यमयी जगह, जहां नागदेवता आज भी विराजमान, लोगों की आस्था का केंद्र बना


Bhilat Dev Temple: मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में एक ऐसा रहस्यमयी स्थल है, जहां आज भी लोग नागदेवता को साक्षात विराजमान मानते हैं. यह स्थान न तो किसी पहाड़ पर है, न किसी घने जंगल में बल्कि शहर के बीचों-बीच, एक साधारण परिवार के घर से शुरू हुई एक ऐसी आस्था की कहानी है, जो आज पूरे क्षेत्र में श्रद्धा का केंद्र बन चुकी है.हम बात कर रहे हैं. खंडवा के दीनदयाल पुरम स्थित नागलवाड़ी भिलट देव मंदिर की.जब घर के बर्तन में दिखाई दिए नागदेव करीब 28 वर्ष पहले दीनदयाल पुरम में रहने वाले संतोष राठौड़ और उनकी पत्नी संध्या राठौर नए मकान में गृह प्रवेश कर रहे थे.सब कुछ सामान्य चल रहा था.लेकिन एक दिन ऐसा हुआ जिसने पूरे परिवार की ज़िंदगी बदल दी.

संध्या राठौर जब रसोई में काम कर रही थीं, तो उन्होंने पानी से भरे एक बर्तन में सूक्ष्म रूप में नागदेवता को तैरते हुए देखा. यह नाग सामान्य आकार का नहीं था,बल्कि बाल से भी महीन, बेहद सूक्ष्म स्वरूप में दिखाई दिया. घबराकर उन्होंने तुरंत यह बात अपने पति संतोष राठौड़ को बताई. पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें भी घर में किसी दिव्य उपस्थिति का आभास होने लगा.

फिर आया वह सपना
कुछ समय बाद संध्या राठौर को एक सपना आया.सपने में भगवान नागदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा-यह मेरा स्थान है. यह सपना परिवार के लिए बेहद रहस्यमयी था. समझ नहीं आ रहा था कि यह संकेत क्या है. इसके बाद राठौर दंपति ने पंडितों, विद्वानों और संतों से परामर्श लिया. विद्वानों ने जो बताया- वह सुनकर दंपति हैरान रह गए. उन्हें बताया गया कि यह नागलवाड़ी क्षेत्र के भिलट देव (नागदेवता) हैं. जिनका प्राचीन स्थान कभी यहां था, जो समय के साथ लुप्त हो गया था. विद्वानों ने दंपति से कहा“आप अत्यंत सौभाग्यशाली हैं. बाबा भिलट देव स्वयं आपके घर प्रकट हुए हैं. यदि आप उन्हें स्थान देंगे, तो परिवार पर सदैव कृपा बनी रहेगी. इसके बाद राठौर दंपति ने घर के प्रांगण में ही भिलट देव का मंदिर बनवाया. धीरे-धीरे यह स्थान सिर्फ घर का मंदिर नहीं रहा,बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र बन गया.

साल में एक बार होता है भव्य प्रकट उत्सवमान्यता है कि माघ माह की दूज तिथि को हर साल बाबा भिलट देव का प्रकट उत्सव मनाया जाता है. इस दिन हवन-पूजन होता है विशेष आरती की जाती है. हजारों श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की जाती है. वहीं नाग पंचमी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है.

बेटी के सामने 7-8 फीट स्वरूप में दिए दर्शन
LOCAL 18 से बातचीत में संतोष राठौड़ बताते हैं कि बाबा ने हमें सूक्ष्म रूप में दर्शन दिए थे,इतने महीन कि बाल से भी पतले दिखाई देते थे.वे बताते हैं कि एक बार दिवाली के दिन उनकी बेटी ने कहाबाबा अब दर्शन नहीं देते.उसी क्षण,बाबा ने 7 से 8 फीट के विराट स्वरूप में दर्शन दिए. उस दिन के बाद बेटी का ही नहीं, पूरे परिवार और शहरवासियों का विश्वास और भी मजबूत हो गया.आज भी जलता है आस्था का दीप. आज यह मंदिर खंडवा की धार्मिक धरोहर बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि=नाग दोष से मुक्ति मिलती है मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.संकट अपने आप दूर हो जाते हैं.

हम खुद सौभाग्यशाली 
बाबा ने हमें अपनी सेवा का अवसर दिया.आस्था जो 28 साल से अटूट है बीते 28 वर्षों से यहां पूजा-अर्चना, विश्वास और श्रद्धा का सिलसिला लगातार जारी है. यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं,बल्कि यह संदेश देता है कि आस्था जब सच्ची हो, तो भगवान स्वयं रास्ता दिखाते हैं. खंडवा का यह भिलट देव मंदिर आज भी लोगों के लिए रहस्य, चमत्कार और विश्वास का जीवंत प्रतीक बना हुआ.



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