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Safed Chandan ki Kheti: बुरहानपुर के तीन भाइयों ने बैंक एफडी छोड़कर सफेद चंदन की खेती में निवेश किया. उनके 620 पौधे अब खेतों में खड़े हैं और 10 साल में इनकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये हो सकती है. सालाना 4 लाख रुपये की आमदनी उन्हें अन्य फसलों से भी होती है. कृषि वैज्ञानिकों और यूट्यूब से सीखकर उन्होंने खेती में नवाचार किया. इस नवाचारी मॉडल को देखने जिले भर के किसान आते हैं.
मोहन ढाकले/बुरहानपुर: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के शाहपुर इलाके में तीन भाइयों संजय, योगेश और वासुदेव महाजन ने खेती में कुछ ऐसा किया है कि लोग हैरान हैं. ये तीनों भाई पहले अपने बच्चों के लिए बैंक में एफडी कराने की सोच रहे थे, लेकिन अचानक दिमाग में आई आइडिया ने उनकी पूरी सोच बदल दी. उन्होंने सोचा एफडी से ज्यादा फायदा तो चंदन के पौधों से होगा. और बस फिर क्या था, उन्होंने अपने दो एकड़ खेत में सफेद चंदन के पौधे लगाने का फैसला कर लिया.
कैसे शुरू हुई सफेद चंदन की खेती
संजय महाजन बताते हैं कि 2022 में उन्होंने पहली बार 220 सफेद चंदन के पौधे लगाए थे. अनुभव के बाद 2024 में और 400 पौधे लगाए गए. अब कुल 620 पौधे उनके खेत में खड़े हैं. उन्होंने पौधों को 12×12 फीट की दूरी पर लगाया ताकि उनका विकास अच्छे से हो. सुबह-शाम नियमित पानी देना और पौधों की देखभाल करना उनकी रोज की आदत बन गई.
10 साल में करोड़ों की कमाई
भाइयों का कहना है कि चंदन के पौधे 15-16 साल में पूरी तरह परिपक्व हो जाते हैं. आज के भाव से चंदन की लकड़ी ₹12,000 प्रति किलो बिकती है. इसी हिसाब से 10 साल बाद उनके पौधों की कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही वे पौधों के बीच तुवर और सब्जी भी उगाते हैं, जिससे सालाना 4 लाख रुपये की आमदनी होती है. ये खेती और नवाचार इतने आकर्षक हैं कि जिले के अन्य किसान भी इसे देखने आते हैं.
सुरक्षा और भविष्य की योजना
कृषि में उनके नवाचार की वजह से उन्होंने सुरक्षा पर भी ध्यान दिया है. उनके पांच भाई हैं, जिनमें से दो फौज में हैं. भविष्य में ये भाई भी चंदन के पौधों की सुरक्षा में मदद करेंगे. कुल मिलाकर, ये तीन भाइयों का प्लान सिर्फ पैसा कमाने का नहीं, बल्कि एक स्थायी और सुरक्षित निवेश का भी उदाहरण बन गया है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें