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Lauki Ki Kheti: फरवरी में लौकी की खेती कम लागत में ज्यादा उत्पादन और शानदार कमाई का मजबूत विकल्प है. अगर किसान इस समय का सही इस्तेमाल करें तो यह फसल उनकी आमदनी को नई दिशा दे सकती है. वह गर्मी की शुरुआत में ही लाखों की कमाई कर सकते हैं. जानें ये खास तरीका…
Agri Tips: अगर आप खेती से अच्छी आमदनी करना चाहते हैं तो फरवरी का महीना आपके लिए बड़ा मौके है. खासकर लौकी की खेती इस समय किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. फरवरी में मौसम पूरी तरह अनुकूल रहता है, न ज्यादा ठंड होती है और न ही तेज गर्मी. इसी कारण इस महीने बोई गई लौकी की बेल तेजी से बढ़ती है, पौधे मजबूत होते हैं और फसल समय से पहले बाजार तक पहुंच जाता है. जल्दी फसल आने से किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं और मुनाफा भी बढ़ जाता है.
फरवरी में पाले का डर नहीं
दिव्या कृषि केंद्र के नरेंद्र पटेल बताते हैं कि अगर किसान सही समय पर और सही विधि से लौकी की खेती करें तो लाखों की कमाई कर सकते हैं. उन्होंने कहा, फरवरी में पाले का खतरा लगभग खत्म हो जाता है, इसलिए फसल को बचाने के लिए किसी खास सुरक्षा की जरूरत नहीं पड़ती. खेत खुले रहने पर भी लौकी की खेती अच्छी होती है, जिससे खर्च कम आता है और फायदा ज्यादा मिलता है.
मचान विधि से खेती के फायदे
खेती की विधि की बात करें तो मचान विधि सबसे ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. मचान पर उगाई गई लौकी के फल जमीन से ऊपर रहते हैं, जिससे उनमें सड़न नहीं लगती और उनका आकार व चमक दोनों बेहतर रहती है. बाजार में ऐसे फलों की मांग ज्यादा होती है और दाम भी अच्छे मिलते हैं. सही देखभाल और समय पर सिंचाई से प्रति एकड़ 15 से 20 टन तक की पैदावार आसानी से ली जा सकती है.
ऐसे करें खेत की तैयारी
खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले गहरी जुताई करें और मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. कतारों के बीच 2 से 2.5 मीटर और पौधों के बीच 45 से 60 सेंटीमीटर की दूरी रखना जरूरी है, ताकि बेलों को फैलने की पूरी जगह मिल सके. गर्मी की फसल होने के कारण नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन खेत में पानी भरने से नुकसान हो सकता है, इसलिए जल निकासी का ध्यान रखें.
गड्ढा विधि काफी लोकप्रिय
लौकी की बेल काफी फैलती है, इसलिए गड्ढा विधि भी किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. इसके लिए 2×2 फीट के गड्ढे बनाकर आधी मिट्टी और आधी गोबर खाद का मिश्रण भरें. हर गड्ढे में 3 से 4 स्वस्थ बीज बोएं और बेलों को सहारा देने के लिए मचान जरूर बनाएं. मचान पर लटके फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे बाजार में किसान को अच्छा भाव मिलता है.
कुल मिलाकर फरवरी में लौकी की खेती कम लागत में ज्यादा उत्पादन और शानदार कमाई का मजबूत विकल्प है. अगर किसान इस समय का सही इस्तेमाल करें तो यह फसल उनकी आमदनी को नई दिशा दे सकती है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें