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Sidhi News: सूखा नदी का उद्गम चुन्हा गांव से हुआ और यह लगभग 25 किमी का सफर तय कर सोन नदी में मिलती है. आजादी से पहले रीवा रियासत के समय प्रकाशित रीवा राज दर्पण किताब में भी सूखा नदी का जिक्र किया गया है.
सीधी. मध्य प्रदेश का सीधी जिला प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. सोन, बनास और भंवरसेन नदियों का संगम पर्यटकों को आकर्षित करता है. वहीं शहर के हृदय स्थल से गुजरने वाली सूखा नदी आज भी लोगों के लिए आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. मान्यता है कि सूखा नदी में स्नान करने से सूखा रोग (कुपोषण) और एनीमिया जैसी बीमारियों से राहत मिलती है. इसी विश्वास के चलते आज भी लोग दूरदराज के गांवों से लोग अपने बच्चों को लेकर यहां स्नान कराने पहुंचते हैं.
पुराने स्वरूप में नहीं रही नदी
वरिष्ठ पत्रकार मनोज शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि सूखा नदी अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं रही. शहर के विस्तार के साथ इसमें सीपेज का गंदा पानी, नालियों का बहाव और कचरा मिलने लगा है. आज यह नदी कई स्थानों पर नाले में तब्दील हो चुकी है, जिसपर नगरपालिका का सुपरविजन नाला बह रहा है. मनोज शुक्ला का कहना है कि स्वच्छ जल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है, यह वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध है लेकिन मौजूदा हालात में प्रदूषित हो चुके सूखा नदी के जल से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलना समझ से परे है. इसके बावजूद लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि वे आज भी अपने बच्चों को यहां स्नान कराते हैं.
बेनाम सिंह बघेल ने बताया कि सूखा नदी का उद्गम स्थल चुन्हा गांव से हुआ है. उस क्षेत्र का पानी निर्मल स्वच्छ रहता है, इसलिए शहर के बाहर लोग स्नान करते हैं. हालांकि शहर में सूखा नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है. 25 किलोमीटर चलकर सोन नदी में यह नदी मिल जाती है. जिले से गुजरने वाली सोन नदी का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व है. यह गंगा की प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी है, जो अमरकंटक से निकलकर बिहार के पटना के पास गंगा में मिलती है. यमुना के बाद सोन गंगा की दूसरी सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी मानी जाती है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.