एसडीएम आदेश का पालन नहीं, दिव्यांग परिवार परेशान: लांजी में रिश्तेदार के मकान से दरारें, न्याय के लिए भटक रहा परिवार – Balaghat (Madhya Pradesh) News

एसडीएम आदेश का पालन नहीं, दिव्यांग परिवार परेशान:  लांजी में रिश्तेदार के मकान से दरारें, न्याय के लिए भटक रहा परिवार – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट के लांजी क्षेत्र में एक दिव्यांग युवक का परिवार एसडीएम न्यायालय के आदेश का पालन न होने से परेशान है। रिश्तेदार द्वारा मकान निर्माण के दौरान उनके घर में दरारें आ गई थीं, जिसके बाद न्यायालय ने मरम्मत और सुरक्षा के निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन नहीं हुआ है। यह मामला दुलापुर निवासी सुखदेव बरगैया से जुड़ा है, जिन्होंने अपने हिस्से में नया भवन बनाने के लिए अपना पुराना मकान जेसीबी से तुड़वाया था। सुखदेव के मकान से सटा हुआ ही उनकी रिश्तेदार उर्वशी बरगैया का मकान था। जेसीबी के उपयोग से उर्वशी के मकान में दरारें आ गईं। इन दरारों के कारण बारिश में उर्वशी के कच्चे मिट्टी की दीवारों में सीलन आने लगी, जिससे मकान की स्थिति जर्जर हो गई है। इसे देखते हुए उर्वशी बरगैया ने एसडीएम न्यायालय में राहत के लिए एक प्रकरण दायर किया था। न्यायालय ने हाल ही में उर्वशी के कच्चे मिट्टी के मकान और संभावित जन-धन हानि को देखते हुए सुखदेव बरगैया को आदेश दिया था। इस आदेश में उन्हें घर की कच्ची दीवारों की मरम्मत करने, सुरक्षित उपाय अपनाने और भवन निर्माण में अंतर बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इस फैसले का अब तक कोई पालन नहीं हुआ है। इसके चलते उर्वशी बरगैया अपने दिव्यांग बेटे के साथ न्याय की उम्मीद में कभी सरकारी कार्यालयों तो कभी जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट रही हैं। इस संबंध में पूर्व विधायक किशोर समरिते ने कहा कि राज्य सरकार गरीबों और कमजोर वर्गों के अधिकारों की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति विपरीत है। उन्होंने राजस्व अभियान और “संकल्प से समाधान” अभियान के बावजूद परिवार को राहत न मिलने को प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल बताया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकरण में अनावेदक सुखदेव बरगैया का भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 164 के तहत एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। इस प्रकरण में उर्वशी पति सावालाल बरगैया अनावेदक के रूप में दर्ज हैं। वहीं, दिव्यांग ईश्वर बरगैया ने बताया कि जिस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने आवेदन किया था, वह अभी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आदेश केवल कागजों तक सीमित है और वे चाहते हैं कि इसका जमीनी स्तर पर भी पालन हो।



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