खंडवा में 500 एकड़ में बनेगा आदिवासी लोक, कला और जड़ी-बूटियों की होगी विरासत; 100 करोड़ की ऐतिहासिक परियोजना

खंडवा में 500 एकड़ में बनेगा आदिवासी लोक, कला और जड़ी-बूटियों की होगी विरासत; 100 करोड़ की ऐतिहासिक परियोजना


मध्य प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए सरकार निरंतर बड़े कदम उठा रही है. उज्जैन में महाकाल लोक, इंदौर में अहिल्या लोक और सागर में संत रविदास लोक के बाद अब खंडवा को एक और महत्वपूर्ण सौगात मिलने जा रही है. खंडवा में प्रदेश का पहला आदिवासी लोक बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 100 करोड़ रुपये होगी. यह आदिवासी लोक न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश में आदिवासी संस्कृति का एक प्रमुख केंद्र बनेगा.

जनजातीय कार्य विभाग ने खंडवा जिले में लगभग 500 एकड़ भूमि पर आदिवासी लोक के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है. यहां आदिवासी समाज की परंपराएं, रीति-रिवाज, लोक जीवन, कला, साहित्य और इतिहास को एक ही परिसर में सहेजा जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि आदिवासी संस्कृति सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी उसे देखे, समझे और महसूस करे.

कला, संस्कृति और जड़ी-बूटियों का होगा संग्रह
प्रस्तावित आदिवासी लोक में आदिवासी समाज से जुड़े महापुरुषों और नायकों की गाथाओं को विशेष रूप से दर्शाया जाएगा. इसके साथ ही यहां एक भव्य कला और संस्कृति संग्रहालय विकसित किया जाएगा, जिसमें आदिवासी चित्रकला, मूर्तिकला, हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित किया जाएगा.. इसके अलावा एक औषधीय उद्यान भी बनाया जाएगा. जहां आदिवासी समाज द्वारा उपयोग की जाने वाली जड़ी-बूटियों और पारंपरिक औषधियों का संरक्षण और शोध किया जाएगा.

देशभर की जनजातीय संस्कृतियों को मिलेगा मंच
आदिवासी लोक सिर्फ निमाड़ अंचल तक सीमित नहीं रहेगा. यहां देशभर के विभिन्न आदिवासी समुदायों की जीवनशैली, पहनावा, आभूषण, नृत्य, लोकगीत और परंपराओं को भी शामिल किया जाएगा. इसके जरिए आमजन को आदिवासी मान्यताओं से रूबरू कराया जाएगा और पर्यटकों के लिए भी यह एक बड़ा आकर्षण बनेगा.

शोध और प्रशिक्षण का भी बनेगा केंद्र
इस आदिवासी लोक में शोध केंद्र की स्थापना की जाएगी, जहां आदिवासी ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और जीवनशैली पर अध्ययन किया जाएगा. वहीं प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को पारंपरिक कला के साथ आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर भी मिल सकेंगे.

भूमि चयन और ब्लू प्रिंट तैयार
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने आदिवासी लोक को लेकर खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ के साथ चर्चा कर ब्लू प्रिंट को अंतिम रूप दे दिया है. करीब दो माह पहले इसकी रूपरेखा तैयार हो चुकी थी और अब भूमि आवंटन की कागजी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

खंडवा के समाजसेवी और प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि यह परियोजना भारतीय संस्कृति और आदिवासी विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की मंशा है कि आदिवासी समाज के महापुरुषों के जीवन और योगदान को हर व्यक्ति जाने और समझे, इसी उद्देश्य से आदिवासी लोक की परिकल्पना की गई है. सुनील जैन के अनुसार, खंडवा का चयन विशेष रूप से किया गया है, क्योंकि यह शहर दादाजी धूनीवाले की नगरी के रूप में जाना जाता है. आदिवासी लोक में दादाजी धूनीवाले की स्मृति के साथ-साथ खंडवा के गौरव, महान गायक किशोर कुमार की स्मृति को भी स्थान दिया जाएगा.

खंडवा को मिलेगा बड़ा फायदा
समाजसेवी सुनील जैन का कहना है कि आदिवासी लोक बनने से खंडवा को पर्यटन, रोजगार और पहचान-तीनों स्तर पर बड़ा फायदा होगा. करीब 500 एकड़ क्षेत्र में बनने वाला यह आदिवासी लोक न सिर्फ खंडवा बल्कि पूरे निमाड़ और मध्य प्रदेश के लिए एक नई पहचान बनेगा.

संस्कृति, सम्मान और रोजगार का संगम
100 करोड़ की लागत से बनने वाला यह आदिवासी लोक आने वाले समय में आदिवासी समाज की संस्कृति, सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक बनेगा. साथ ही यह परियोजना खंडवा को प्रदेश के सांस्कृतिक नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करेगी. खंडवा के लिए यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आदिवासी विरासत को सहेजने और दुनिया तक पहुंचाने की ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है.



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