गेहूं कटाई के बाद खाली खेत में लगाएं ये फसल, ढाई महीने में कर देगी मालामाल

गेहूं कटाई के बाद खाली खेत में लगाएं ये फसल, ढाई महीने में कर देगी मालामाल


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गेहूं कटाई के बाद खाली खेत में लगाएं ये फसल, ढाई महीने में कर देगी मालामाल

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Agriculture News: मूंग की फसल में सिंचाई का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है. गर्मी के मौसम में इस फसल को 4 से 5 बार पानी देना अनिवार्य होता है. हल्की मिट्टी में 10 दिन और भारी मिट्टी में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए.

खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रबी सीजन की फसलें अब अंतिम दौर में हैं. कई किसानों ने गेहूं और चना के पकने के बाद कटाई शुरू कर दी है जबकि बाकी खेत भी जल्द खाली होने वाले हैं. हर साल की तरह इस बार भी होली के आसपास खेत पूरी तरह खाली हो जाएंगे लेकिन इसके बाद खरीफ फसलों की बुआई जून में होती है, यानी करीब 2 से 3 महीने तक खेत खाली पड़े रहते हैं लेकिन किसान चाहें तो इस खाली समय में भी अपने खेत से लाखों रुपए की आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खेत में पानी की पर्याप्त सुविधा है, तो किसान गर्मी का मूंग लगाकर अच्छी आमदनी ले सकते हैं. निमाड़ क्षेत्र की जलवायु मूंग के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है. यही वजह है कि यहां कम समय में मूंग की फसल बेहतर उत्पादन देती है और बाजार में इसकी मांग भी बनी रहती है. गर्मी की मूंग किसानों के लिए इसलिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह बहुत कम समय में तैयार हो जाती है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ आरके सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि यह फसल करीब 75 से 80 दिन में पककर तैयार हो जाती है. यानी किसान ढाई महीने में फसल काटकर सीधे मंडी में बेच सकते हैं. इसमें लागत भी ज्यादा नहीं आती और खेत भी खाली नहीं रहता, जिससे सालभर जमीन का सही उपयोग हो पाता है. खास बात यह भी है कि मूंग दलहनी फसल है, जो जमीन की सेहत सुधारने का काम करती है. इससे मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ती है और अगली फसल को इसका सीधा फायदा मिलता है. यानी एक ही फसल से कमाई भी होती है और जमीन की उर्वरता भी सुधरती है.

इन किस्मों से मिलेगा अच्छा उत्पादन
उन्होंने बताया कि गर्मी में मूंग की खेती के लिए किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. इसमें IPM 410-3 (शिखा), IPM 205-7 (विराट) और MH 421 जैसी किस्में बेहतर मानी जाती हैं. ये किस्में 75 से 80 दिन में तैयार हो जाती हैं और प्रति एकड़ 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं. सही देखभाल करने पर उत्पादन 8 क्विंटल तक भी पहुंच सकता है. बुआई के लिए प्रति एकड़ 7 से 8 किलोग्राम बीज पर्याप्त है.

मूंग की खेती का सही तरीका
उन्होंने आगे बताया कि बुआई से पहले खेत की तैयारी करना जरूरी है. इसके लिए खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लें. अगर गोबर की खाद उपलब्ध है, तो करीब 100 क्विंटल प्रति एकड़ डालना फायदेमंद रहेगा. इसके साथ एक बोरी डीएपी खाद का उपयोग किया जा सकता है. अगर डीएपी नहीं है, तो किसान 75 किलो NPK 12:32:16 या 10:26:26 का इस्तेमाल कर सकते हैं.

सिंचाई का रखें खास ध्यान
उन्होंने बताया कि मूंग की फसल में सिंचाई का भी खास ध्यान रखना पड़ता है. गर्मी के मौसम में इस फसल को 4 से 5 बार पानी देना जरूरी होता है. हल्की मिट्टी में 10 दिन के अंतराल पर और भारी मिट्टी में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए. साथ ही खेत को खरपतवार से साफ रखना जरूरी है ताकि फसल की बढ़वार अच्छी हो सके.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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