गेहूं किसानों के लिए गेमचेंजर टिप! ऐसे बचाएं बीज का पूरा खर्च, अगले साल नहीं खरीदना पड़ेगा एक भी दाना

गेहूं किसानों के लिए गेमचेंजर टिप! ऐसे बचाएं बीज का पूरा खर्च, अगले साल नहीं खरीदना पड़ेगा एक भी दाना


Gehu Katai ke Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में इस समय खेतों में सुनहरी गेहूं की फसल पूरी तरह पक चुकी है. कई किसानों ने कटाई भी शुरू कर दी है. इस बार उत्पादन अच्छा रहा है, जिससे किसान खुश नजर आ रहे हैं. लेकिन इसी बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को एक ऐसी सलाह दी है, जिससे वे अगले साल हजारों रुपये बचा सकते हैं.

जिले में रबी सीजन में गेहूं और चना प्रमुख फसलें हैं. इस साल करीब पौने दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई. समय पर बुआई करने वाले किसानों की फसल अच्छी तैयार हुई है और कई जगहों पर हार्वेस्टिंग तेजी से चल रही है.

कटाई से पहले ही कर लें बीज का चुनाव
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन किसानों ने इस बार नई या उन्नत वैरायटी का बीज बोया और अच्छी पैदावार मिली, वे उसी फसल से अगली बुआई के लिए बीज तैयार कर सकते हैं. इसके लिए कटाई से पहले खेत में जाकर अच्छे, स्वस्थ और एक जैसे पौधों की पहचान करनी होगी.

ये काम थोड़ा ध्यान मांगता है, लेकिन फायदा बहुत बड़ा देता है. अगर सही पौधों से बीज लिया जाए तो उसकी क्वॉलिटी बनी रहती है और अगली फसल भी बेहतर मिलती है.

क्या है “रोगिंग” प्रक्रिया? जानिए आसान भाषा में
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह के मुताबिक किसानों को कटाई से पहले “रोगिंग” प्रक्रिया अपनानी चाहिए. इसका मतलब है खेत में जो पौधे कमजोर, बीमार या अलग किस्म के दिखें, उन्हें जड़ समेत निकाल देना. जैसे बहुत छोटी या बहुत लंबी बालियां, दानों में कमजोरी, बीमारी के लक्षण, अलग ऊंचाई या अलग रंग के पौधे, इनको हटाने से खेत में सिर्फ स्वस्थ और एक जैसी फसल बचती है.

ऐसे मिलेगा शुद्ध और ताकतवर बीज
जब खेत में एक समान और मजबूत बालियां रह जाती हैं, तो उनसे मिलने वाला बीज शुद्ध होता है. उसमें मिलावट नहीं रहती और अंकुरण भी अच्छा होता है. यही बीज अगले सीजन में बोने पर बेहतर उत्पादन देता है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीज के लिए चुनी गई फसल को अलग से काटकर साफ जगह पर सुखाएं. पूरी तरह सूखने के बाद उसे नमी से बचाकर सुरक्षित स्टोर करें.

खर्च बचेगा, मुनाफा बढ़ेगा
अगर किसान इस प्रक्रिया को अपनाते हैं, तो बाजार से महंगा बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा. खेत से तैयार बीज स्थानीय मिट्टी और मौसम के हिसाब से ज्यादा अनुकूल होता है और रोगों का असर भी कम पड़ता है. यानि इस बार की गेहूं की फसल सिर्फ इस साल का फायदा नहीं देगी, बल्कि अगले साल की तैयारी भी अभी से हो जाएगी.



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