Last Updated:
हरदा जिले के ग्रामीण इलाकों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद मिलने से स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं. लाखादेह और बापचा गांव में अस्पतालों पर ताले लटके मिले और परिसर में झाड़ियां उगी थीं. ग्रामीणों का आरोप है कि यहां न डॉक्टर आते हैं और न दवाएं मिलती हैं. स्वास्थ्य विभाग ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
हरदा में आरोग्य मंदिर बंद पड़े हुए हैं.
प्रवीण सिंह तंवर
हरदा. जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत सरकारी दावों से अलग नजर आ रही है. शासन ने जिन उप स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बदलकर ग्रामीणों को बेहतर इलाज, मुफ्त जांच और दवाओं का भरोसा दिया था, वहां जमीनी स्थिति निराशाजनक बताई जा रही है. कई गांवों में भवन तो बने हैं, लेकिन ताले लटके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि महीनों तक कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं आता और जरूरत पड़ने पर मरीजों को दूसरे गांव या जिला अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है.
जिले में कुल 75 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित बताए जाते हैं. इन केंद्रों पर 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा है, जिनमें मुफ्त जांच, कैंसर स्क्रीनिंग, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल और सामान्य दवाएं शामिल हैं. लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि ग्राम लाखादेह और बापचा में आरोग्य मंदिर बंद मिले. भवनों के बाहर ताला लटका था और परिसर में झाड़ियां उगी थीं. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि साल में एक-दो बार औपचारिकता निभाने के अलावा यहां नियमित सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं.
ग्राउंड रिपोर्ट में क्या मिला?
ग्रामीण लाखादेह में बने आरोग्य मंदिर को कंडम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई. स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत की हालत जर्जर है और रखरखाव नहीं हुआ. भवन के दरवाजे जंग खा रहे हैं और परिसर में सफाई तक नहीं होती.
ना डॉक्टर, ना नर्स और शर्मनाक हालात
अरविंद जाट नामक ग्रामीण ने बताया कि इमारत तो बना दी गई, लेकिन न डॉक्टर आया और न ही नर्स. उन्होंने कहा कि यह भवन केवल रिकॉर्ड के लिए खड़ा है. न कभी ताला खुला और न सफाई हुई. सुरेश पवार ने कहा कि गांव के लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि लाखों रुपये खर्च कर अस्पताल बना दिया गया, लेकिन किसी एक मरीज का इलाज यहां नहीं हुआ. गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन है. कार्यक्रम प्रबंधक दिनेश चौहान ने कहा कि यह हमारी सूचना में नहीं है, हमारे जिले में शत प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर्स और नर्स की तैनाती है, अगर किसी स्थान केंद्र पर ऐसा नहीं है तो इसके लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी से चर्चा कर फैसला लिया जाएगा.
स्वास्थ्य सेवाओं का दावा बनाम हकीकत
आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना के तहत गांव स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का उद्देश्य था. इन केंद्रों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम की तैनाती की गई है. लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते. इससे टीकाकरण और मातृ-शिशु सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि जिन भवनों की स्थिति खराब है, वहां मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए तो कार्रवाई की जाएगी.
सवालों के घेरे में ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा
हरदा के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं की यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है. ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता बताई जाती रही है. ऐसे में बंद पड़े आरोग्य मंदिर और अनुपस्थित स्टाफ नीति और क्रियान्वयन के बीच की दूरी को उजागर करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधा केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर भी दिखनी चाहिए. जब तक नियमित डॉक्टर, नर्स और दवाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक इन भवनों का कोई अर्थ नहीं है. गांवों में बेहतर निगरानी और जवाबदेही की मांग अब तेज हो रही है.
About the Author
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें