बिना स्कूल वाले गांव में वनरक्षक की सैलरी से झोपड़ी में चल रही क्लास, 9वीं की छात्रा टीचर

बिना स्कूल वाले गांव में वनरक्षक की सैलरी से झोपड़ी में चल रही क्लास, 9वीं की छात्रा टीचर


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बुरहानपुर के इस गांव में कोई सरकारी स्कूल नहीं है. ग्रामीणों ने जन सहयोग से एक झोपड़ी में स्कूल शुरू किया है. वनरक्षक भी अपने वतन से सहयोग कर रहे हैं. कक्षा 9वीं की छात्रा शिक्षक है. 60 बच्चे पढ़ रहे हैं. पर 10 साल बाद भी सरकार नहीं बना पाई यहां स्कूल….

Burhanpur News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के दूरस्थ गांव बोमलिया पाठ में कोई सरकारी स्कूल ही नहीं है. बच्चों को दूर के गांवों में जाना पड़ता है. हालांकि, ग्रामीणों की जज्बे और एक वनरक्षक की पहल से यहां एक अनोखा स्कूल चल रहा है, जहां कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली सीमा बडोले खुद शिक्षक है. यह स्कूल एक साधारण झोपड़ी में चलता है और करीब 60 बच्चे यहां पढ़ते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की उदासीनता के बावजूद वे जन सहयोग से बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं.

इस स्कूल की कहानी शुरू हुई करीब 10 साल पहले. वनरक्षक कमलेश रघुवंशी ने मांडवा में पदस्थ रहते हुए अपनी तनख्वाह से बचत कर इस स्कूल की नींव रखी. कमलेश बताते हैं कि बोमलिया पाठ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में शिक्षा की पहुंच न के बराबर थी. बच्चे जंगलों में भटकते थे या घरेलू कामों में लगे रहते थे. सरकारी स्कूल या आंगनवाड़ी की कमी ने स्थिति को और बदतर बना दिया. ग्रामीणों के साथ मिलकर जन सहयोग से स्कूल शुरू किया. आज यह स्कूल कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है.

प्रशासन अब भी ध्यान नहीं देता…
सीमा बडोले, जो खुद नवीं कक्षा की छात्रा है, यहां टीचर है. कमलेश अपनी बचत से उन्हें वेतन देते हैं, ताकि स्कूल सुचारू रूप से चल सके. क्षेत्र के निवासी कैलाश ने लोकल 18 की टीम से बताया, “हमारे गांव में आज तक कोई सरकारी स्कूल या आंगनवाड़ी नहीं बनी. कमलेश रघुवंशी ने अपनी कमाई से यह पहल की. 10 साल से हम जन सहयोग से स्कूल चला रहे हैं. झोपड़ी में 60 बच्चे पढ़ते हैं. सीमा बेटी बच्चों को पढ़ाती है, जो खुद अभी पढ़ रही है. बच्चे अब अक्षर ज्ञान से आगे बढ़कर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं. लेकिन, प्रशासन ध्यान नहीं देता.” ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से बच्चों में न केवल पढ़ाई की रुचि बढ़ी है, बल्कि वे आत्मविश्वास से भर गए हैं.

सरकार यहां बनाए स्कूल
वनरक्षक कमलेश रघुवंशी की यह पहल प्रेरणादायक है. वे कहते हैं, “मैंने अपनी तनख्वाह से बचत कर स्कूल शुरू किया, क्योंकि बच्चों का भविष्य दांव पर था. ग्रामीणों ने साथ दिया, लेकिन सरकार से कोई मदद नहीं मिली. हम चाहते हैं कि यहां सरकारी स्कूल बने, ताकि बच्चे बेहतर सुविधाओं के साथ पढ़ सकें.” स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, न किताबें पर्याप्त हैं, न बैठने की जगह. फिर भी, जन सहयोग से यह चल रहा है. ग्रामीणों ने अब अधिकारियों से मांग की है कि बोमलिया पाठ में सरकारी स्कूल स्थापित किया जाए.

इस मामले पर नेपानगर के एसडीएम भागीरथ वाखला से बात की गई. उन्होंने कहा, “यह समस्या हमारे संज्ञान में है. हम भोपाल में पत्राचार करेंगे. शासन से आदेश मिलते ही कार्रवाई की जाएगी. हम भी चाहते हैं कि क्षेत्र के बच्चे शिक्षा ग्रहण करें.” हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी घोषणाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन अमल नहीं हुआ.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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