Last Updated:
Lal sona balaghat story : बालाघाट की मलाजखंड कॉपर माइन का संचालन हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड संचालित कर रही है. मलाजखंड कॉपर माइंस में भारत के कुल तांबा भंडार का लगभग 70 प्रतिशत का हिस्सा है. पहले यह भारत की सबसे बड़ी ओपन कास्ट माइंस थी लेकिन अब यह अंडरग्राउंड काम करना शुरू कर चुकी है. यहीं वजह है कि मलाजखंड को कॉपर सिटी के नाम से जाना जाता है.
Balaghat News : मध्य प्रदेश के बालाघाट को वन और खनिज के लिए पूरे मध्य प्रदेश में जाना जाता है. यहां पर सतपुड़ा की पर्वत श्रृंखलाएं और आधे से ज्यादा भू-भाग पर वनस्पति है. वहीं, दूसरी तरफ बालाघाट में वन संपदा ही नहीं खनिज संपदा से भी परिपूर्ण है. ऐसे में यहां पर मैंगनीज के अलावा कॉपर के लिए भी बालाघाट अपनी ख्याति रखता है. बालाघाट की मलाजखंड कॉपर माइंस 46 सालों से देश का सबसे बड़ा तांबा भंडार है. वहीं, एशिया की प्रमुख तांबा खदानों में से एक है. ऐसे में हम आपको बताएंगे कि जिले की कॉपर माइंस से जुड़े रोचक तथ्य…
भारत की सबसे बड़ी कॉपर माइंस
बालाघाट की मलाजखंड कॉपर माइन का संचालन हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड संचालित कर रही है. मलाजखंड कॉपर माइंस में भारत के कुल तांबा भंडार का लगभग 70 प्रतिशत का हिस्सा है. पहले यह भारत की सबसे बड़ी ओपन कास्ट माइंस थी लेकिन अब यह अंडरग्राउंड काम करना शुरू कर चुकी है. यहीं वजह है कि मलाजखंड को कॉपर सिटी के नाम से जाना जाता है.
जानिए कैसे हुई इसकी खोज
बताया जाता है कि भारत के सबसे बड़े तांबा खदान की खोज 1889 में कर्नल ब्लूमफील्ड ने की थी. इसके बाद वास्तविक आर्थिक क्षमता लगाने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 1966-1969 तक चला. इसके बाद सबसे पहले साल 1973 में खनन पट्टा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड को दिया गया. वहीं, इसकी असल शुरूआत 12 नवंबर 1980 को हुई थी. उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी बालाघाट की कॉपर सिटी मलाजखंड भी आई थी. इसके बाद से ये प्रोजेक्ट लगातार चल रहा है.
बताया जाता है कि यह माइंस करीब 2.5 अरब वर्ष पुरानी चट्टानें है. तांबा प्रमुख तौर पर ग्रेनाइट की चट्टानों के बीच पाया जाता है. इसे पोरफायरी तांबा भंडार कहा जाता है.
राम मंदिर भी जा चुका है तांबा
कंपनी ने राम मंदिर निर्माण के लिए 32 टन तांबा दान दिया है. इसमें करीब 70 हजार कॉपर स्ट्रिप और 775 कॉपर रॉड शामिल है. इनके इस्तेमाल से मंदिर में लगे विशाल पत्थरों को मजबूती से जोड़ने का काम किया गया है. ऐसे में मंदिर के स्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी. बालाघाट जिले का नाम इतिहास के पन्नों में राम मंदिर के निर्माण कार्य में दिए जाने वाले योगदान में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है. ऐसे में ये योगदान बालाघाट और मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है. अब राम मंदिर में बालाघाट का योगदान इसे ऐतिहासिक धरोहर में जीवित रखेगा.
इतिहासकार वीरेंद्र सिंह गहरवार का कहना है कि बालाघाट की धरती से तांबे का सबसे बड़ा खजाना है. फिर भी यहां के लोग पलायन करते हैं. वहीं, दूसरी तरफ यहाँ पर विकास भी बालाघाट से कोसों दूर है. ऐसे में जन प्रतिनिधियों को ध्यान देना चाहिए कि जितना बालाघाट देश को दे रहा है. उतना ही सरकार को बालाघाट के लिए देना चाहिए.
About the Author
7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
