असली रंग, बीमारियों की दवा, कॉस्मेटिक कंपनियां ढूंढती हैं ये फल, खेती से अमीर होंगे किसान

असली रंग, बीमारियों की दवा, कॉस्मेटिक कंपनियां ढूंढती हैं ये फल, खेती से अमीर होंगे किसान


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असली रंग के लिए कॉस्मेटिक कंपनियां ढूंढती हैं ये फल, खेती से अमीर होंगे किसान

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ये फल कांटेदार होता है. इसके अंदर लाल रंग के बीज पाए जाते हैं. फल सूखने के बाद इन बीजों से गहरा लाल प्राकृतिक रंग निकलता है, जिससे पारंपरिक सिंदूर तैयार किया जाता है. यही रंग भोजन और कॉस्मेटिक उत्पादों में प्राकृतिक रंग के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. कंपनियां इन फलों को खरीदती हैं. जानें खेती से फायदे…

Agri Tips: हिंदू धर्म में सिंदूर को सुहाग और सौभाग्य का पवित्र प्रतीक माना जाता है. सदियों से विवाहित महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर भरकर पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती रही हैं. लेकिन, बदलते समय के साथ बाजार में मिलने वाले अधिकतर सिंदूर में कई प्रकार के रासायनिक तत्व मिलाए जाने लगे हैं, जो त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रहे हैं. इन रसायनों के कारण एलर्जी, खुजली, जलन और स्किन इंफेक्शन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं.

रक्तबीज का पौधा
सीधी के आयुष अधिकारी डॉ. नरेंद्र पटेल ने लोकल 18 को बताया कि आयुष कार्यालय की नर्सरी में सिंदूर का पौधा उपलब्ध है. इस पौधे को अंग्रेजी में कुमकुम ट्री या कमील ट्री कहा जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे रक्तबीज के नाम से भी जाना जाता है. यदि किसान बड़े पैमाने पर इस पौधे का रोपण करते हैं तो इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.

पूरी तरह से प्राकृतिक सिंदूर
डॉ. नरेंद्र पटेल के अनुसार, सिंदूर का पौधा बहुवर्षीय होता है, यानी एक बार लगाने के बाद यह कई वर्षों तक फल देता है. यह पौधा लगभग तीन साल में फल देना शुरू कर देता है. इसके फल और बीज से पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल सिंदूर तैयार किया जाता है. एक पौधे से लगभग डेढ़ किलो तक बीज प्राप्त हो जाते हैं, जिनसे गहरा लाल रंग निकलता है. यह रंग पूरी तरह प्राकृतिक होता है और त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है. यही कारण है कि इस रंग का उपयोग विदेशों में कॉस्मेटिक उत्पादों और खाद्य पदार्थों में भी किया जाता है.

इन कामों में भी इस्तेमाल
सिंदूर के पौधे का उपयोग केवल सिंदूर बनाने तक ही सीमित नहीं है. इसके बीजों से मिलने वाला प्राकृतिक रंग लिपस्टिक, फेस पाउडर और कपड़ों को रंगने में भी इस्तेमाल किया जाता है. इस कारण इसकी बाजार में अच्छी मांग भी रहती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सिंदूर के पौधे की खेती कम लागत में आसानी से की जा सकती है. एक पौधा लगभग 30 से 35 रुपये में मिल जाता है और इसे ज्यादा देखभाल की आवश्यकता नहीं होती. इसके फल को सुखाकर पीसने से शुद्ध और प्राकृतिक सिंदूर तैयार किया जाता है, जो त्वचा के लिए सुरक्षित होता है.

बीमारियों में भी लाभ
सिंदूर का पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर माना जाता है. आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. विपिन के अनुसार, इसके पत्ते लीवर से जुड़ी बीमारियों, खासकर पीलिया में लाभकारी माने जाते हैं. पुराने समय से इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर सेवन करने की परंपरा रही है. इसके बीज और फल त्वचा संबंधी रोगों में भी उपयोगी बताए जाते हैं. साथ ही खाने-पीने की चीजों को प्राकृतिक रंग देने के लिए भी इसका इस्तेमाल हो सकता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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