बड़वानी में आजाद अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले अतिथि शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सीएम के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिक्षकों ने नायब तहसीलदार सोनू गोयल के माध्यम से अपनी व्यथा सरकार तक पहुंचाई। शिक्षकों ने बताया कि वे लंबे समय से अल्प मानदेय पर काम कर रहे हैं, लेकिन उनका भविष्य अब भी सुरक्षित नहीं है। 18 साल की सेवा के बाद भी बेरोजगारी का डर ज्ञापन देने आए शिक्षकों ने बताया कि वे पिछले करीब 18 वर्षों से शासकीय स्कूलों में अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। इतने वर्षों के अनुभव के बावजूद सरकार ने अब तक उनके नियमितीकरण या पद स्थायित्व को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। शिक्षकों ने इस बात पर चिंता जताई कि बीच सत्र में यदि किसी नियमित शिक्षक का स्थानांतरण या पदोन्नति होकर उस स्कूल में आगमन होता है, तो अतिथि शिक्षक को तत्काल हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया से वे अचानक बेरोजगार हो जाते हैं, जिससे उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। 62 वर्ष तक सेवा, समान वेतन की मांग अतिथि शिक्षक संघ ने अपनी मांगों की सूची में कई प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया है। संगठन ने मांग की है कि अतिथि शिक्षकों के लिए 12 माह का सेवा अनुबंध किया जाए और उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष निर्धारित की जाए। इसके अलावा, एक विभागीय परीक्षा आयोजित कर उन्हें नियमित किया जाए और नियमित शिक्षकों की तरह समान वेतन व अवकाश की सुविधाएं प्रदान की जाएं। अनुभवी शिक्षकों को प्राथमिकता देने का आग्रह संघ ने तकनीकी स्तर पर भी सुझाव दिए हैं। उन्होंने मांग की है कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर नए पंजीकरणों को तत्काल रोका जाए। इसके बजाय, उन पुराने और अनुभवी अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो वर्षों से शिक्षा विभाग को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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