MBA पास कल्पेश का जलवा! केला, कपास, गन्ना उगाकर 15 साल से छाप रहे नोट

MBA पास कल्पेश का जलवा! केला, कपास, गन्ना उगाकर 15 साल से छाप रहे नोट


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Burhanpur News: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के किसान कल्पेश साड़ीवाला ने एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाय खेती को अपना करियर बनाया. उन्होंने 2011 से खेती की शुरुआत की और आज करीब 30 एकड़ जमीन पर केला, कपास, गन्ना, मक्का, सोयाबीन और चना जैसी फसलें उगा रहे हैं. आधुनिक तकनीक और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से वे हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी खेती में कई स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है जिससे गांव के लोगों को फायदा हो रहा है. जानिए कैसे पढ़े-लिखे इस युवा किसान ने खेती को ही अपनी सफलता की कहानी बना दिया.

MBA Pass Farmer Success Story: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक युवा किसान की कहानी इन दिनों चर्चा में है. यहां के कल्पेश साड़ीवाला ने एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने के बजाय खेती को अपना करियर बनाया. आज वे न सिर्फ खुद अच्छी कमाई कर रहे हैं बल्कि गांव के कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

बुरहानपुर के किसान अक्सर नई तकनीक और नए प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं. कल्पेश भी उन्हीं किसानों में से एक हैं, जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती में नवाचार कर अपनी अलग पहचान बनाई है.

पिता से सीखी खेती, 15 साल से कर रहे काम
कल्पेश साड़ीवाला बताते हैं कि एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता से खेती करना सीखा. साल 2011 से उन्होंने खेती की शुरुआत की और तब से लगातार खेती कर रहे हैं. आज करीब 15 साल से खेती करते हुए वे 30 एकड़ जमीन पर अलग-अलग फसलें उगा रहे हैं. उनकी खेती में केला, कपास, गन्ना, मक्का, सोयाबीन और चना जैसी फसलें शामिल हैं.

हर साल लाखों की हो रही कमाई
कल्पेश का कहना है कि वे मौसम और बाजार की मांग के हिसाब से फसलें लगाते हैं. इसी वजह से उन्हें अच्छा उत्पादन भी मिलता है. वे बताते हैं कि खेती से उन्हें हर साल लगभग 6 से 7 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है. इसके साथ ही उनकी खेती में करीब 10 से 12 लोगों को स्थायी रूप से काम भी मिलता है.

कृषि वैज्ञानिकों से लेते हैं सलाह
कल्पेश आधुनिक तरीके से खेती करने में विश्वास रखते हैं. वे समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं और उनकी सलाह के अनुसार खेती करते हैं. उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीक और वैज्ञानिक तरीके अपनाए तो खेती में भी अच्छी आमदनी की जा सकती है.

आपदा आने पर होता है नुकसान
हालांकि खेती में जोखिम भी कम नहीं है. कल्पेश बताते हैं कि कई बार तेज हवा, आंधी-तूफान या फसलों में बीमारी आ जाने से नुकसान भी हो जाता है. इसी वजह से सालभर का औसत निकालें तो करीब 6 से 7 लाख रुपये की कमाई हो पाती है. इसके बावजूद वे खेती को ही अपना भविष्य मानते हैं और आगे भी नई फसलों के साथ प्रयोग करने की योजना बना रहे हैं.

किसानों के लिए बना प्रेरणा
कल्पेश साड़ीवाला का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य अपने क्षेत्र के लोगों को रोजगार देना है. इसलिए वे अपनी खेती में स्थानीय लोगों को काम देते हैं. आज उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है जो पढ़ाई के बाद खेती को अपनाने के बारे में सोचते हैं.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें



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