सिंहस्थ से पहले बड़ा फैसला! फर्जी साधुओं की धरपकड़ को चलेगा ‘कालनेमी’ अभियान

सिंहस्थ से पहले बड़ा फैसला! फर्जी साधुओं की धरपकड़ को चलेगा ‘कालनेमी’ अभियान


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Ujjain News: उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियां अब तेज होने लगी हैं. इसी के चलते अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने फर्जी साधुओं के खिलाफ कालनेमी अभियान शुरू करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि नकली और गृहस्थ साधुओं की पहचान कर उनपर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

उज्जैन. मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में हर महीने लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है. यह संख्या 2028 में करोड़ों में पहुंचने वाली है क्योंकि उज्जैन में सिंहस्थ (महाकुंभ) लगने जा रहा है. इसी के तहत अवंतिका नगरी में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर साधु-संतों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं. मेले की पवित्रता बनाए रखने के लिए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने फर्जी साधुओं की पहचान कर उन्हें बाहर करने के लिए कालनेमी अभियान चलाने की घोषणा की है. उनका कहना है कि जो लोग साधु के वेश में गलत तरीके से रह रहे हैं, उनपर सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही गृहस्थ साधुओं पर भी नियमों के तहत कार्रवाई की बात कही गई है.

दरसल देशभर में फर्जी साधुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने लोकल 18 को बताया कि कई लोग साधु का वेश धारण कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं. ऐसे नकली साधुओं की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कालनेमी अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने कहा कि कई लोग भगवा वस्त्र पहनकर साधु बन जाते हैं लेकिन उनका असली साधु-संतों से कोई संबंध नहीं होता. कुछ मामलों में ऐसे लोगों के गलत गतिविधियों में शामिल होने की आशंका भी रहती है. उत्तराखंड में इस अभियान के दौरान कई फर्जी साधुओं की पहचान कर उन्हें जेल भेजा जा चुका है. अब सिंहस्थ को देखते हुए उज्जैन में भी यही अभियान चलाया जाएगा. परिषद का कहना है कि असली साधु-संतों के पास आधार कार्ड और अपने अखाड़े का पहचान पत्र होना अनिवार्य होगा ताकि नकली साधुओं पर आसानी से कार्रवाई की जा सके.

गृहस्थ संतों को चेतावनी
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने आगे कहा कि जो लोग साधु बनकर परिवार के साथ रह रहे हैं, उन्हें सावधान हो जाना चाहिए. संतों का जीवन सेवा, धर्म कार्य, यज्ञ-अनुष्ठान और समाज कल्याण के लिए होता है. साधु का उद्देश्य गरीब बच्चों की शिक्षा और लोगों की भलाई करना है न कि परिवार चलाना, इसलिए जो साधु-संत पत्नी और बच्चों के साथ रह रहे हैं, उनके खिलाफ भी जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

क्यों लिया गया ऐसा फैसला?
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ के दौरान अखाड़ा परिषद ने मंदाकिनी देवी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी लेकिन बाद में उनके खिलाफ आपराधिक मामले सामने आने पर साल 2024 में परिषद ने उन्हें पद से हटा दिया. हाल ही में उनपर एक अन्य महामंडलेश्वर को दुष्कर्म के मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया है. हालांकि मंदाकिनी देवी ने इन आरोपों को गलत बताया है और रविन्द्र पुरी पर उन्हें झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाया है, इसलिए रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा है कि अब आगे से ऐसा न हो, इसलिए कालनेमी अभियान की शुरुआत करेंगे, जिससे लोगों का साधु-संतों के ऊपर से भरोसा न उठे.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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