वन्यजीवों के एरिया से होकर गुजरने वाले और ग्वालियर से बैतूल को जोड़ने वाला 634 किमी लंबा नेशनल हाईवे अब जल्द पूरा हो सकेगा। हाईकोर्ट ने चार साल पहले इसे वन्यजीवों के लिए असुरक्षित बताते हुए काम रोकने का आदेश दिया था। वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से जरूरी परमिशन मिलने के बाद ही काम चालू करने के आदेश दिए थे। अब सारी परमिशन मिलने के बाद काम शुरू किया जाने वाला है। यह निर्माण इस मार्ग के बरेठा घाट सेक्शन पर 20.9 किमी में निर्माण कार्य परमिशन के चलते शुरू होगा। यह मार्ग भोपाल-नागपुर कॉरिडोर का भी एक हिस्सा है, जो बैतूल होते हुए गुजरता है। इस परियोजना के अंतर्गत बैतूल तक के अधिकांश खंडों में निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसमें से 21 किलोमीटर का एक भाग शेष रह गया था, जिसमें केसला रेंज, भौंरा रेंज तथा बरेठा घाट के तीन खंड (कुल 20.91 किमी) सम्मिलित हैं। ये सभी खंड वन्यजीवों के मूवमेंट खासतौर पर टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर के चलते संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं। इसको ध्यान में रखते हुए 1 अप्रैल 2022 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर स्थगन का आदेश जारी किया गया था और आवश्यक मंजूरी के बाद ही निर्माण करने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए NHAI द्वारा सभी परमिशन ली गई हैं। परियोजना के लिए वाइल्डलाइफ बोर्ड एवं केंद्र सरकार से अपेक्षित सभी आवश्यक मंजूरियां अब प्राप्त हो चुकी हैं। ब्लैक स्पॉट होने के कारण जरूरी हुआ सुरक्षा सुधार बरेठा घाट का यह खंड सड़क सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में यह मार्ग केवल दो लेन का है जिसके कारण यहां घुमावदार (कर्व) रास्ते और सीमित चौड़ाई के चलते यातायात में कठिनाई होती है। भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण इस क्षेत्र में अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इस मार्ग पर दो प्रमुख ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां बार-बार दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है। घुमावदार रास्ता, ढलान, सीमित विजिबिलिटी और ट्रैफिक मूवमेंट की वजह से जोखिम बढ़ता है। पुलिस थानों में उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस खंड में कुल 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन दुर्घटनाओं में 18 लोगों की मृत्यु हुई है जबकि लगभग 62 लोग घायल या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह क्षेत्र वन्यजीवों की मूवमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है। अक्सर जानवर सड़क पार करते हैं, जिससे अचानक दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। NHAI की 4-लेन निर्माण योजना तैयार वाइल्डलाइफ मिटीगेशन स्ट्रक्चर के साथ होगा निर्माण बरेठा घाट और अन्य संवेदनशील वन क्षेत्र खंडों के लिए NHAI ने वन्यजीव और प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी है। यह योजना उच्च न्यायालय और वाइल्डलाइफ बोर्ड के निर्देशों के अनुसार बनाई गई है, ताकि सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखा जा सके। इस योजना के तहत मार्ग में विशेष वाइल्डलाइफ मिटिगेशन स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें कुल 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास शामिल हैं। इन संरचनाओं के स्थान और डिजाइन में न्यायालय और वाइल्डलाइफ बोर्ड के निर्देशों के अनुसार आवश्यक बदलाव किए गए हैं, ताकि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन सुरक्षित रहे और उनके आवास पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। सड़क और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे हाईवे में ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और अन्य आवश्यक संकेत लगाए जाएंगे। घाट सेक्शन में NJ टाइप क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। साथ ही पूरे मार्ग में नोइज़ बैरियर और चेन लिंक फेंसिंग के साथ बम्बू क्रीपर का उपयोग किया जाएगा, ताकि शोर और अन्य पर्यावरणीय प्रभाव कम हो और वन्यजीव सुरक्षित रहें। परियोजना से होने वाले फायदे
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