Last Updated:
जबलपुर में शिक्षा विभाग के पनागर विकासखंड में पदस्थ अकाउंटेंट ने शासन को करोड़ों का रुपयों का चूना लगाया है. अकाउंटेंट ने अपने पत्नी और बेटियों को कागजों में फर्जी शिक्षक दिखाया और उनके नाम से पैसा निकालकर खातों में भेजा. अब पुलिस ने इस पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है.
जबलपुर में सामने आया बड़ा घोटाला
जबलपुर के पनागर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. यहां अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी बिल और नकली शिक्षकों के नाम पर 01 करोड़ 11 लाख रुपए का गबन किया गया है. घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक आरोपी अकाउंटेंट ने अपनी पत्नी और बेटियों को कागजों में अतिथि शिक्षक दिखाकर हर महीने उनके खातों में वेतन ट्रांसफर किया.
कलेक्टर द्वारा गठित एस आई टी की जांच में शिक्षा विभाग के अधिकारी कर्मचारी और अन्य लोगों की मिली भगत भी उजागर हुई है, जिसके बाद सहायक संचालक द्वारा पनागर थाना में दिए गए प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, ताकि फर्जीवाड़ा करने वाले पूरे गिरोह का पर्दाफाश हो सके.
फर्जी नाम जोड़कर निकाला वेतन
14 आरोपियों में से 6 शासकीय कर्मचारी और 8 अशासकीय है. सीएसपी राजेश्वरी कौरव ने बताया कि यह गड़बड़ी वर्ष 2018 से 2025 तक के कार्यकाल ने लगातार चलती रही. मामले की पूरी शिकायत सहायक संचालक सोनम कटारे द्वारा दी गई, जिसमें बताया गया कि पूर्व बीईओ शैलबाला डोंगरे, सेवानिवृत्त बीईओ त्रयंबक गणेश खरे, सेवानिवृत्त लेखापाल, नरेंद्र कुमार तिवारी, सहायक ग्रेड विजय कुमार भलावी, सेवानिवृत्त शिक्षक गणेश प्रसाद शुक्ला, सहायक ग्रेड 2 अनिल कुमार सहित अन्य लोगों ने मिलकर शिक्षकों की सूची में फर्जी नाम जोड़े और उनके नाम से वेतन निकालते आ रहे है.
पूरे नेटवर्क की हो रही जांच
जांच में सामने आया कि आरोपी अकाउंटेंट विजय भलावी फर्जी नाम जोड़कर उन्हें शिक्षक दिखाता था और उनके नाम से वेतन निकालकर 16 अलग अलग खातों में ट्रांसफर करता था इनमें से 4 खाते उसकी पत्नी, बेटियों और रिश्तेदारों के थे. सीएसपी राजेश्वरी कौरव का कहना है कि फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है.