मध्य प्रदेश क्राइम फाइल में इस बार बात ऐसे सनसनीखेज केस की जिसने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था की परतें उधेड़ दी थीं। शहर के सबसे व्यस्त इलाके हबीबगंज में, थाने से चंद कदमों की दूरी पर, भीड़ के बीच एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया, जिसने पुलिस और रेलवे
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शाम के वक्त जब सड़कों पर रफ्तार, रोशनी और लोगों की आवाजाही अपने चरम पर थी, उसी भीड़ के बीच ऐसी वारदात हुई, जिसकी किसी को आहट तक नहीं मिली। उस रात शहर की भागदौड़ के बीच एक लड़की की चीखें शोर में दब गईं। जब सच सामने आया तो हर कोई सन्न रह गया।
क्या था पूरा मामला… उस शाम लड़की के साथ क्या हुआ? लड़की कौन थी? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
31 अक्टूबर 2017 को रात के 10:30 बजे थे। भोपाल शहर सोने की तैयारी कर रहा था। विजय कौशल आरपीएएफ थाना हबीबगंज में नाइट ड्यूटी पर तैनात थे, थाने में माहौल सामान्य था। तभी रेलवे आउटर की तरफ से दौड़कर एक लड़की हांफते हुए थाने के गेट पर आकर खड़ी होती है, उसकी हालत देखकर सबके होश उड़ गए।
पिता भी पुलिस में… और बेटी इस हालत में ड्यूटी पर मौजूद विजय कौशल ने तुरंत नंबर लेकर उसके पिता को फोन लगाया। विजय ने कहा-
आपकी बेटी हबीबगंज आरपीएफ थाने में है… हालत ठीक नहीं है…

पिता रोशन (बदला हुआ नाम), जो खुद भोपाल आरपीएफ में एएसआई थे, बेटी की आवाज सुनते ही टूट गए। रिया (काल्पनिक नाम) ने मां से बात कराने को कहा… और जैसे ही मां की आवाज सुनी, वह फूट-फूटकर रो पड़ी। इसके बाद विजय ने लड़की को पानी दिया और किसी तरह उसे संभालते हुए बैठाया।
मां विदिशा में इंतजार कर रही थी, बेटी का फोन बंद था इससे ठीक पहले रिया की मां विदिशा रेलवे स्टेशन पर उसका इंतजार कर रही थी। भोपाल से आने वाली दो-तीन ट्रेन निकल जाने के बाद भी रिया के नहीं पहुंचने पर उसकी चिंता बढ़ती जा रही थी। उसका फोन भी 7 बजे से लगातार बंद आ रहा था। उन्होने पति को फोन कर बताया कि बेटी का फोन भी नहीं लग रहा है, जाकर पता कीजिए बेटी कहां है।

थाने पहुंचे बेबस पिता ने खुद को और बेटी को संभाला
करीब 15-20 मिनट में रिया के पिता थाने पहुंच गए। वर्दी में खड़े एक बेबस पिता के सामने खड़ी थी उसकी टूटी हुई बेटी। वह पिता से लिपटकर रो पड़ी। कुछ बोलने की हालत में नहीं थी। पिता ने खुद को और बेटी को संभाला। सीधे उसे लेकर रेलवे क्वार्टर चले गए। थोड़ी देर में मां भी वहां पहुंच गई। मा ने रिया के घावों की सफाई की और पेनकिलर लगाया। बेटी को संभालते हुए हालत स्थिर होने पर घटना की पूरी आपबीती सुनी। रिया की बात सुन मां के पैरों तले जमीन खिसकी
रिया ने जो आपबीती सुनाई, वह सुन मां के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई हो। मां-बाप को जिस बात का अंदेशा था वही सामने आया। उसके साथ चार लोगों ने गैंगरेप किया, रिया इतना ही बता पाई।

UPSC की तैयारी, रोज का अप-डाउन रिया भोपाल से यूपीएससी की तैयारी कर रही थी। एमपी नगर जोन-2 स्थित एक बड़े कोचिंग संस्थान में कोचिंग करती थी। उसके पिता भी आरपीएफ में एएसआई थे और भोपाल स्टेशन थाने में पदस्थ थे। उनको रेलवे की तरफ से भोपाल में क्वार्टर भी मिला था, लेकिन रिया विदिशा से रोज भोपाल अप-डाउन करती थी। वह रोज सुबह की ट्रेन से भोपाल आती और शाम को मां के पास वापस विदिशा लौट जाती थी। 31 अक्टूबर: जिंदगी की सबसे काली रात
31 अक्टूबर की रात उसके जीवन की सबसे भयानक रात होगी उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था। शाम सात बजे वह कोचिंग खत्म कर हबीबगंज (रानी कमलापति) रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ी, उसे विदिशा निकलना था। रोड के एक तरफ कोचिंग और ठीक दूसरी तरफ रेलवे का आउटर था। यह स्टेशन जाने का एक शॉर्टकट था, जहां से स्टेशन मात्र 5-10 मिनट की दूरी पर था, जबकि मेन रोड से जाने पर कम से कम आधे घंटे लग जाते।

अंधेरे में 50 कदम… और जुल्म की शुरुआत
रोड से आउटर की ओर करीब 50 कदम बढ़ते ही अंधेरा घना हो जाता है। इसी सुनसान जगह पर रिया के साथ गैंगरेप की वारदात हुई। हैरानी की बात यह है कि घटनास्थल से रेलवे का आरपीएफ थाना महज 50 मीटर की दूरी पर था। सुबह होते ही रिया को लेकर उसके पिता एमपी नगर थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद थाने में मौजूद सब-इंस्पेक्टर टेकाम, रिया और उसके परिजनों के साथ घटनास्थल का मुआयना करने रेलवे लाइन पर पहुंचे।
इलाके से बाहर… जिम्मेदारी से पुलिस ने पल्ला झाड़ा घटनास्थल का मुआयना करने के बाद एमपी नगर थाने के एसआई ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह इलाका उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने रिया और उसके परिजनों को हबीबगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी और वहां से चले गए। वापसी के दौरान रिया ने एक युवक को पहचानते हुए उसकी ओर इशारा किया। पास ही कुछ लोग ताश खेल रहे थे, उन्हीं में से एक आरोपी था।

18 घंटे बाद भी एफआईआर नदारद किसी तरह जान बचाकर सभी लोग बस्ती से बाहर निकले और हबीबगंज थाने पहुंचे। घटना के करीब 18 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी थी। हबीबगंज थाने ने भी यह कहते हुए मामला टाल दिया कि घटनास्थल उनके सर्किल में नहीं आता, जिससे कार्रवाई में लगातार देरी होती रही। पीड़िता को जीआरपी थाना हबीबगंज में शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा गया। काफी मशक्कत के बाद पुलिस जीरो पर एफआईआर दर्ज करने को तैयार हुई। बयान शुरू ही हुए थे कि जीआरपी थाना हबीबगंज के पुलिसकर्मी पीड़िता को अपने साथ ले जाने पहुंच गए।

पुलिस के पास कई सवाल अब भी बरकरार थे। आखिर रिया के साथ गैंगरेप करने वाले आरोपी कौन थे? थाने और स्टेशन से महज 50 कदम की दूरी पर घटना को अंजाम कैसे दिया? किसी को इस वारदात की भनक क्यों नहीं लगी?
इन सवालों के जवाब कल क्राइम फाइल्स के पार्ट -2 में पढ़िए…
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