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Raisen News: मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण मध्य प्रदेश के रायसेन से होने वाला 6 बिलियन डॉलर का बासमती चावल एक्सपोर्ट लगभग ठप्प हो गया है, जबकि पूसा बासमती शिपमेंट आमतौर पर वेस्ट एशिया में रमजान से पहले पहुंचती थी. इसका सीधा असर किसान और मिल मालिकों पर हो रहा है.
Basmati Rice Export Crisis: भारत हर साल लगभग 6 बिलियन डॉलर का बासमती चावल एक्सपोर्ट करता है, जिसमें आधा हिस्सा वेस्ट एशिया जाता है, लेकिन हाल ही में मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते यह व्यापार लगभग ठप्प हो गया है. मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की चावल मिलें मार्च में रात भर चलती थीं. पूसा बासमती, जो लंबी दाने वाली और खुशबूदार होती है, मंडीदीप, सतलापुर और ओबेदुल्लागंज के इंडस्ट्रियल क्लस्टर से गुजरकर नवी मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट पर भेजी जाती थी. ईरान और सऊदी अरब में रमजान से पहले स्टॉक करने के लिए ये शिपमेंट समय पर पहुंचती थीं.
लेकिन इस साल 28 फरवरी के बाद, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एयरस्ट्राइक की, रायसेन के किसान और एक्सपोर्टर परेशानी में पड़ गए. राहुल जैन रायसेन के बड़े एक्सपोर्टर्स में से एक, कहते हैं कि लगभग सभी शिपमेंट रोकी हुई हैं. ट्रांजिट में भी रुकावट आई है. उनके अनुसार 20-25 करोड़ रुपये का मासिक टर्नओवर फिलहाल फ्रीज हो गया है. रायसेन का जिला नर्मदा घाटी में फैला है, जहां 3.45 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है और सालाना 6 लाख टन से ज्यादा चावल पैदा होता है. जिले के मंडीदीप, सतलापुर, ओबेदुल्लागंज, बरेली, उदयपुरा और उमरावगंज में 20 से ज्यादा मिलें हैं.
बासमती चावल एक्सपोर्ट में वेस्ट एशिया का बहुत बड़ा हिस्सा
भारत की बासमती चावल एक्सपोर्ट में वेस्ट एशिया का हिस्सा बहुत बड़ा है. सऊदी अरब, इराक, ईरान, UAE और यमन अकेले भारत के बासमती एक्सपोर्ट का आधा हिस्सा खरीदते हैं. मार्च और अप्रैल का समय पीक लोडिंग का होता है, क्योंकि रमजान और ईद से पहले मांग बढ़ जाती है. लेकिन अब फ्रेट रेट बहुत बढ़ गए हैं. पहले USD 2,500 प्रति कंटेनर खर्च आता था, अब यह USD 7,000-9,000 हो गया है. कंटेनर भी उपलब्ध नहीं हो रहे. कई एक्सपोर्टर्स के 40 कंटेनर समुद्र में फंसे हैं.
किसान और मिल मालिकों पर असर
इससे न सिर्फ एक्सपोर्टर, बल्कि किसान और मिल मालिक भी प्रभावित हैं. प्रोसेसिंग रुक गई है और स्टॉक पर 150 करोड़ रुपये का लोन पड़ा हुआ है. बासमती की कीमतें खेत और होलसेल मार्केट दोनों जगह 8-10% गिर गई हैं. कुछ एक्सपोर्टर्स जैसे उदित माहेश्वरी यूरोपियन मार्केट की तरफ रूट बदल रहे हैं, लेकिन यह महंगा और लंबा रास्ता है. उनका कहना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने तक समस्या जारी रहेगी और रमजान के बाद ही लोडिंग सीजन फिर से सामान्य होगा.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें