3 राज्य, 2 देश, फिर मिली जर्सी तो कर दिया विराट को चैलेंज, दिल्ली का वो दिलेर

3 राज्य, 2 देश, फिर मिली जर्सी तो कर दिया विराट को चैलेंज, दिल्ली का वो दिलेर


नई दिल्ली.  एक खिलाड़ी के लिए उसका बल्ला ही उसकी ज़ुबान होता है, लेकिन कभी-कभी रनों का अंबार भी बहरे सिस्टम को जगाने के लिए काफी नहीं होता. मिलिंद कुमार की कहानी भारतीय घरेलू क्रिकेट के उन पन्नों की तरह है, जो रिकॉर्ड्स से तो सुनहरे हैं, लेकिन जिन पर ‘अन्याय’ की धूल जमी है. यह कहानी एक ऐसे बल्लेबाज़ की है जिसने दिल्ली की गलियों से सपना देखा, घरेलू क्रिकेट का ‘किंग’ बना, पर अपनों की बेरुखी ने उसे सात समंदर पार जाने पर मजबूर कर दिया.

मिलिंद कुमार ने अपने करियर की शुरुआत दिल्ली के लिए की थी.  प्रतिभाशाली थे, तकनीक शानदार थी, लेकिन दिल्ली क्रिकेट की अंदरूनी राजनीति और गलाकाट प्रतिस्पर्धा के बीच इस हीरे को वो चमक नहीं मिल पा रही थी जिसके वो हकदार थे. साल दर साल बीत रहे थे, रन बन रहे थे, लेकिन टीम में जगह पक्की होना तो दूर, कदर तक नहीं हो रही थी. हारकर 2018 में मिलिंद ने एक बड़ा फैसला लिया दिल्ली छोड़ ‘सिक्किम’ जाने का.
रनों का वो सैलाब, जिसे अनसुना कर दिया गया

सिक्किम के लिए साल 2018-19 का रणजी सीजन मिलिंद के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था उन्होंने उस सीजन में 1331 रन कूट डाले.  वह बल्लेबाजी नहीं कर रहे थे, बल्कि रनों की मशीन बन चुके थे. हर मैच के साथ एक नया कीर्तिमान स्थापित हो रहा था.  क्रिकेट पंडितों को लगा कि अब तो चयनकर्ताओं के दरवाजे टूट जाएंगे, अब तो टीम इंडिया की जर्सी मिलिंद के पास होगी लेकिन अफसोस, रिकॉर्ड्स की इस चीख को चयनकर्ताओं ने अनसुना कर दिया तर्क दिया गया कि ये रन ‘प्लेट ग्रुप’ (कमजोर टीमों) के खिलाफ बने हैं.  अगले साल खुद को साबित करने के लिए वो त्रिपुरा चले गए वहां उन्होंने मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट में 67 की औसत से रन बनाकर सबको चुप करा दिया पर नियति को कुछ और ही मंजूर था. न आईपीएल में बड़ा मौका मिला, न नीली जर्सी का बुलावा आया.

34 की उम्र में ‘देश निकाला’ और नई शुरुआत

जब भारत में उम्मीद की सारी खिड़कियां बंद हो गईं, तब 34 साल की उम्र में मिलिंद ने वो कठिन फैसला लिया जो कोई भी खिलाड़ी भारी मन से लेता है अपना देश छोड़कर अमेरिका (USA) जाने का.  जिस खिलाड़ी को भारत का गौरव होना चाहिए था, उसने अमेरिका की माइनर लीग में अपनी किस्मत आजमाई.आज मिलिंद कुमार अमेरिका की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं.  इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखते ही उन्होंने अपनी क्लास दिखाई है.

वनडे में विराट से बेहतर रिकॉर्ड

एक रोचक तथ्य यह भी चर्चा में रहता है कि एक निश्चित दौर और आंकड़ों के लिहाज से वनडे क्रिकेट में उनका बल्लेबाजी औसत विराट कोहली जैसे दिग्गजों को भी टक्कर देता है या उनसे बेहतर नजर आता है. मिलिंद कुमार ने वनडे क्रिकेट में इतिहास रचते हुए कई रिकॉर्ड बनाए हैं.उन्होंने मात्र 21 पारियों में 1016 रन बनाकर 67.73 की शानदार औसत हासिल की है. वह 155 रन बनाकर पारी समाप्त (नाबाद) करने वाले पहले बल्लेबाज बने और 21 पारियों में तेजी से रन बनाकर 1000 का आंकड़ा पार किया. हालांकि कोहली का कद और अनुभव अतुलनीय है, लेकिन मिलिंद के ये आंकड़े उस टीस को बयां करते हैं कि अगर उन्हें भारत में मौका मिलता, तो शायद आज भारतीय बल्लेबाजी क्रम की तस्वीर कुछ और होती.
मिलिंद कुमार की कहानी हमें सिखाती है कि टैलेंट कभी मरता नहीं, वह बस रास्ता बदल लेता है .आज जब वो अमेरिका की जर्सी में मैदान पर उतरते हैं, तो हर भारतीय प्रशंसक के मन में एक ही सवाल होता है “क्या हम अपने ही एक ‘रत्न’ को पहचानने में चूक गए?” मिलिंद भले ही भारत के लिए नहीं खेल पाए, लेकिन क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम एक ऐसे योद्धा के रूप में दर्ज रहेगा जिसने सिस्टम से हार नहीं मानी, बल्कि सरहद पार जाकर अपना साम्राज्य खड़ा किया.



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