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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ द्विविवाह का आरोप यह कहते हुए रद्द कर दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ एक से ज्यादा पत्नियां रखने की इजाजत देता है. कोर्ट की तरफ से कहा गया कि मौजूद दोनों पक्ष मुस्लिम पर्सनल लॉ के दायरे में आते हैं. कोर्ट ने इसी वजह से मुकदमा जारी रखना प्रक्रिया का दुरुपयोग माना.
मुस्लिम व्यक्ति द्वारा दूसरी शादी द्विविवाह नहीं, MP हाईकोर्ट का फैसला
Madhya Pradesh High Court: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां उसने एक व्यक्ति पर लगे द्विविवाह के आरोप को रद्द किया और कहा कि किसी मुस्लिम पुरुष द्वारा अपनी पहली पत्नी के साथ शादी में कायम रहते हुए दूसरी शादी करने पर इंडियन पीनल कोड की धारा 494 के तहत द्विविवाह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. इसके लिए कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला भी दिया.
मुस्लिम व्यक्ति ने पहली पत्नी से तलाक लिए बिना की दूसरी शादी
एक महिला ने अपनी पति के खिलाफ उत्पीड़न और मारपीट का आरोप लगाया था. उसकी तरफ से बताया गया कि बच्चा ना होने के बाद पति ने उसके साथ ज्यादती की और वैवाहिक क्रूरता की. उसने बताया कि बाद में उसके पति ने दूसरी शादी कर ली और द्विविवाह के तहत अपराध किया है. महिला ने अपने मुस्लिम पति पर यह भी आरोप लगाया कि वह उसके ऊपर आपसी सहमति से तलाक (खुला) लेने के लिए भी दबाव डाल रहा था. उसने यह सभी आरोप साल 2022 में लगाए थे.
हाईकोर्ट ने इस वजह से रद्द किया द्विविवाह का आरोप
महिला ने अपने पति पर जान से मारने की धमकी देने और आत्महत्या के लिए उकसाने का भी आरोप लगाया. बाद में ट्रायल कोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ आरोप तय किए. इस पर व्यक्ति ने पूरे मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी कि उस पर द्विविवाह के तहत आरोप नहीं लगाया जा सकता. क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ पुरुषों को एक से ज्यादा विवाह करने की इजाजत देता है. अब हाईकोर्ट ने उसके खिलाफ द्विविवाह के आरोप को तो रद्द कर दिया है, लेकिन बाकी आरोप में उसके खिलाफ मुकदमा चलता रहेगा.
हाईकोर्ट की तरफ से मुस्लिम पर्सनल लॉ का दिया गया हवाला
जस्टिस बीपी शर्मा ने इस मामले पर कहा कि IPC की धारा 494 (जिसे अब ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ की धारा 82 से बदल दिया गया है) निजी कानून के अधीन है. जज की तरफ से बताया गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, मुस्लिम व्यक्तियों को कुछ शर्तों के साथ एक से ज्यादा शादी करने की इजाजत देता है. बस वह पर्सनल लॉ के द्वारा मान्यता प्राप्त शर्तों का पालन करे. कोर्ट की तरफ यह भी बताया गया है कि दूसरी शादी सिर्फ इस आधार पर अमान्य नहीं हो जाती कि पहली शादी अभी भी कायम है.
क्या है IPC की धारा 494
IPC की धारा 494 संबंधित कानून द्विविवाह (Bigamy) से जुड़ी हुई है. इसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी करता है, तो यह अपराध माना जाता है. यानी जब तक पहली पत्नी या पति जीवित है और कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है, तब तक दूसरी शादी करना गैरकानूनी है. कुछ धर्मों और विशेष परिस्थितियों में यह नियम अलग हो जाते हैं.