कलेक्टरों, एसडीएम को किसानों की चिंता करने निर्देश: खरीदी केंद्रों पर हेल्प डेस्क, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम; CMO से होगी गेहूं खरीदी की मॉनिटरिंग – Bhopal News

कलेक्टरों, एसडीएम को किसानों की चिंता करने निर्देश:  खरीदी केंद्रों पर हेल्प डेस्क, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम; CMO से होगी गेहूं खरीदी की मॉनिटरिंग – Bhopal News




मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गुरुवार से गेहूं खरीदी शुरू होगी। सभी कलेक्टरों और राजस्व अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छाया का इंतजाम कराएं। गेहूं की खरीदी के मामले में सामाजिक और सेवाभावी संस्थाएं भी सहयोग करें। गेहूं खरीदी की मॉनिटरिंग के लिए सीएम निवास में भी कंट्रोल रूम बनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बातें किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल संवाद के दौरान कहीं। सीएम यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए समर्पित है, किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर फैसले लिए जा रहे हैं। सीएम ने कहा गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बारदान की पर्याप्त व्यवस्था है। गेहूं की प्रति क्विंटल कीमत 2650 रुपए करना बड़ी चुनौती थी, हम इसे 2700 रुपए प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे। किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलवाने के लिए हम समर्पित है। खरीदी केंद्रों पर हेल्प डेस्क, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनेंगे खरीदी केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किये जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। खरीदी केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के द्वारा भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके पहले सीएम यादव ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के पहले मंत्रियों से कहा था कि 9 अप्रेल से की जाने वाली गेहूं की खरीदी के लिए सबसे पहले लघु और सीमांत पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं लिया जाएगा, उनकी स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रियों को दिए निर्देश में कहा था कि अपने प्रभार के जिलों में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करें और प्रशासन व किसानों के साथ समन्वय बनाए रखें।



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