नरवाई से नोटों की बरसात! एक घंटे में साफ खेत, भूसे से तगड़ी कमाई

नरवाई से नोटों की बरसात! एक घंटे में साफ खेत, भूसे से तगड़ी कमाई


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Agri News : गेहूं कटाई के बाद खेतों में बचा अवशेष अब किसानों के लिए नई चुनौती नहीं बल्कि अवसर बनता दिख रहा है. आधुनिक मशीनों के बढ़ते उपयोग से खेती में बदलाव आ रहा है जिससे खेतों की सफाई तेज हो रही है और किसानों को अतिरिक्त आय के नए विकल्प मिल रहे हैं साथ ही पर्यावरण को भी राहत मिल रही है.

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सतना: गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बची पराली अब किसानों के लिए सिरदर्द नहीं बल्कि कमाई का नया जरिया बनती जा रही है. आधुनिक कृषि तकनीक के चलते स्ट्रा रीपर मशीन ने खेती के तरीके को बदल दिया है. यह मशीन न सिर्फ खेतों को जल्दी साफ करती है बल्कि पराली को सीधे उपयोगी भूसे में बदलकर किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है. ऐसे में जहां पहले पराली जलाने से प्रदूषण फैलता था वहीं अब किसान इसे संसाधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

कैसे काम करती है स्ट्रा रीपर मशीन
स्ट्रा रीपर एक आधुनिक कृषि यंत्र है जो कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद खेत में बचे गेहूं के डंठलों को काटकर उन्हें बारीक भूसे में बदल देता है. यह मशीन 50 से 60 हॉर्स पावर वाले ट्रैक्टर के साथ जुड़कर काम करती है. इसके आगे लगे ब्लेड डंठलों को काटते हैं फिर ऑगर के माध्यम से इन्हें मशीन के अंदर भेजा जाता है जहां थ्रेसिंग और सफाई की प्रक्रिया पूरी होती है. अंत में तैयार भूसा पाइप के जरिए सीधे ट्रॉली में भर दिया जाता है.

समय और लागत दोनों में भारी बचत
इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कार्यक्षमता है. यह एक घंटे में लगभग 1 से 2 एकड़ खेत को साफ कर सकती है जिससे किसानों को मजदूरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. इससे समय की बचत के साथ-साथ लागत भी कम होती है. खेत जल्दी खाली होने से किसान अगली फसल की तैयारी समय पर कर पाते हैं जिससे उत्पादन चक्र भी बेहतर होता है.

कमाई के नए रास्ते खोल रहा भूसा
स्ट्रा रीपर से तैयार होने वाला भूसा किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन रहा है. इस भूसे का उपयोग पशु चारे के रूप में किया जाता है जिसकी डेयरी सेक्टर में लगातार मांग बनी रहती है. इसके अलावा भूसे से ब्रिक्स भी बनाए जाते हैं जो कोयले के विकल्प के रूप में फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होते हैं. इस तरह किसान एक ही फसल अवशेष से कई तरह की कमाई कर सकते हैं.

पराली जलाने से मुक्ति और पर्यावरण को राहत
पहले किसान पराली को नष्ट करने के लिए आग लगा देते थे जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता था और मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती थी. लेकिन अब स्ट्रा रीपर के इस्तेमाल से इस समस्या का समाधान मिल रहा है. किसान पराली को जलाने के बजाय उसका बेहतर उपयोग कर रहे हैं जिससे पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है.

कीमत और सरकारी सब्सिडी
भारत में स्ट्रा रीपर मशीन की कीमत लगभग 3 लाख से 5 लाख रुपये के बीच होती है जो इसके मॉडल और ब्रांड पर निर्भर करती है. किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार इस मशीन पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान करती है. इससे छोटे और मध्यम किसान भी इस तकनीक को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं.

संभागीय कृषि यंत्री एस के नारनवरे ने कहा कि खेतों में बची नरवाई को किसान समस्या मानने के बजाय अवसर के रूप में देखें. यदि सही तकनीक का उपयोग किया जाए तो यही पराली अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है. जिससे पराली जलाने की बजाय स्ट्रा रीपर जैसी मशीनों का उपयोग कर पर्यावरण और अपनी आय दोनों को बढ़ावा मिल सकता है.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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