पितरों को प्रसन्न करने का दिन, जानें कब है वैशाख अमावस्या और आसान पूजा विधि

पितरों को प्रसन्न करने का दिन, जानें कब है वैशाख अमावस्या और आसान पूजा विधि


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Ujjain News: वैशाख अमावस्या का दिन पितरों की शांति और पुण्य कमाने का विशेष अवसर होता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी, सरोवर या घर पर स्नान कर खुद को शुद्ध करें. इसके बाद तिल, गुड़ और आटे से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें.

उज्जैन. हिंदू धर्म में वैशाख माह को दान, पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है. इस माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, जिसे वैशाख अमावस्या के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं. साथ ही पितरों की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करने का भी विशेष विधान है. हर साल आने वाली 12 अमावस्याओं में यह अमावस्या बेहद खास मानी जाती है. इस बार तिथि को लेकर लोगों के मन में थोड़ी उलझन बनी हुई है. ऐसे में उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस दिन किए जाने वाले खास उपाय, जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख अमावस्या की तिथि 16 अप्रैल गुरुवार को रात में 08 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी. इसका समापन अगले दिन 17 अप्रैल शुक्रवार को शाम 05 बजकर 21 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल यानी शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी.

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
वैशाख अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान करना अच्छा रहेगा. अगर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-दान न कर पाएं, तो सूर्योदय के बाद कर लें. वैशाख अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 25 मिनट से 05 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. वैशाख अमावस्या के दिन सूर्योदय 05 बजकर 54 मिनट पर होगा.

क्या है पूजा विधि?
वैशाख अमावस्या का दिन पितरों की शांति और पुण्य कमाने का विशेष अवसर माना जाता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी, सरोवर या घर पर स्नान कर स्वयं को शुद्ध करें. इसके बाद तिल, गुड़ और आटे से पिंड बनाकर श्रद्धा भाव से पितरों को अर्पित करें. तर्पण करते समय जल में काले तिल डालकर विधिपूर्वक अर्पण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और दक्षिणा देना इस दिन का प्रमुख पुण्य कार्य है. साथ ही भगवान शिव की पूजा कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से जीवन में शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व
वैशाख अमावस्या का दिन आस्था और पुण्य का विशेष अवसर माना जाता है. इस दिन स्नान और दान का खास महत्व होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मान्यता है कि इस तिथि पर दान करने से पितृ दोष के प्रभाव कम होते हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद शुभ माना गया है. साथ ही गाय, कौवे और कुत्ते को भोजन कराना भी पुण्यकारी होता है, जिससे जीवन के दुख और बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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