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Bundelkhand News: रेलवे द्वारा खजुराहो, छतरपुर, सागर, भोपाल के बीच नई रेल लाइन बिछाने के लिए सर्वे कराने का बजट जारी कर दिया गया है. इसके बाद एक बार फिर यहां नई रेल लाइन को लेकर उम्मीदें जगी हैं. हालांकि, इसके पहले एक बार प्रस्ताव को रेलवे खारिज कर चुका है.
Sagar News: पश्चिम मध्य रेलवे ने बुंदेलखंड को बड़ी सौगात दी है, इसकी वजह से अब यहां की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती है. रेलवे द्वारा खजुराहो, छतरपुर, सागर, भोपाल के लिए नई रेल लाइन का सर्वे करने के लिए बजट जारी कर दिया गया है. इसमें 320 km लंबी नई रेलवे लाइन के लिए 69 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं. सर्वे का बजट स्वीकृत होने के बाद एक बार फिर यहां नई रेल लाइन को लेकर उम्मीदें जाग गई हैं. नई रेलवे लाइन भोपाल को यूनेस्को में शामिल विश्व धरोहर खजुराहो से जोड़ेगी.
इसकी वजह से यहां पर्यटन के साथ-साथ उद्योग-धंधों को भी बढ़ावा मिलेगा. अभी खजुराहो से छतरपुर तक लाइन है, लेकिन यह नई रेलवे लाइन छतरपुर से आगे बढ़कर सागर जिले के शाहगढ़ बंडा से होते हुए कर्रापुर से गढ़पहरा, राहतगढ़ से विदिशा या रायसेन के आसपास होते हुए भोपाल तक बिछाई जा सकती है. इसमें जो बड़े नगर-कस्बे होंगे, वहां पर स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जो रेलवे की मुख्य धारा से जुड़ेंगे. इससे ग्रामीण क्षेत्र का भी विकास होगा. यह रेल लाइन 100 से अधिक गांव से होकर गुजरने का अनुमान है.
सर्वे में होगी इतनी चीजों की जांच
सर्वे में अधिकारियों और इंजीनियर द्वारा यह देखा जाएगा कि 320 km लंबी नई रेलवे लाइन की रहा में कितने नदी-नाले हैं, जहां पुल बनाने की आवश्यकता पड़ेगी? कहां पहाड़ को काटना पड़ेगा? कहां सरकारी भूमि है और कहां कृषि भूमि का भू अर्जन करना पड़ेगा? कितने गांव, कितने मकान इस लाइन के बीच आएंगे? उसके हिसाब से कितना मुआवजा वितरण करना पड़ेगा? अगर नई रेल लाइन को बिछाया जाता है तो ट्रैफिक कैसा रहेगा? यातायात की अभी क्या स्थिति है? जहां से लाइन गुजर रही, वहां व्यापारिक गतिविधियां कैसी हैं? जिन क्षेत्र से यह लाइन जाएगी, कितने लोगों को फायदा होगा? इसका पूरा लेखा जोखा तैयार किया जाएगा. फाइनल रिपोर्ट सबमिट होने के बाद हाई लेवल कमिटी अध्ययन करेगी. इसके बाद ही वह निर्णय लेगी कि यह प्रोजेक्ट यहां पर कब से शुरू कर सकते हैं.
एक बार टाला जा चुका प्रस्ताव
बता दें कि बुंदेलखंड का छतरपुर कभी डकैतों के एरिया के रूप में जाना जाता था, क्योंकि यहां पर जंगल, पहाड़, नदियां, बीहड़, बॉर्डर सब कुछ था. यहां डकैत बिना किसी परेशानी के डेरा डाले रहते थे, जिसकी वजह से यह इलाका पिछड़ा हुआ रहा. साल 1988 से छतरपुर सागर रेल लाइन डालने की मांग की जाती रही है. यहां तक की साल 2011 में सर्वे होने के बाद साल 2014 में एक प्रोजेक्ट भी बनाकर तैयार हो गया था, जिसमें 1643 करोड़ की अनुमानित लागत से लाइन बिछाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में यह कहकर इसको ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था कि इससे यातायात नहीं मिलेगा और रेलवे को लंबा घाटा हो जाएगा.
प्रोजेक्ट शुरू में होने में लगेगा इतना समय
नई रेलवे लाइन से सागर, छतरपुर जिले के आम लोगों के साथ व्यापारी, छोटे-बड़े उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा. सागर में रेल सुधार समिति के अध्यक्ष रवि सोनी बताते हैं कि बजट स्वीकृत होने के बाद अगर सर्वे का काम ठीक ढंग से हो जाए तो यह फाइनल रिपोर्ट 6 महीने में ही तैयार हो सकती है. इसके बाद जब सरकार का 2027 का बजट आएगा, तब उसमें राशि का प्रावधान कर काम शुरू किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि किसी भी शहर या जिले की प्रगति वहां की रेल लाइन से ही सबसे अधिक होती है. यह रेल लाइन बढ़ाने के बाद बुंदेलखंड की तकदीर बदल जाएगी.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें