इस गेहूं की रोटी सुबह बनाई तो शाम तक रहेगी मुलायम! किसान ने तैयार किया अपना ब्रांड

इस गेहूं की रोटी सुबह बनाई तो शाम तक रहेगी मुलायम! किसान ने तैयार किया अपना ब्रांड


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इस गेहूं की सुबह बनी रोटी शाम तक रहेगी मुलायम! किसान ने तैयार किया अपना ब्रांड

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Farmer Success Story: आज के मिलावटी दौर में सेहत बड़ी चीज है. यही वजह है कि जो लोग जागरूक हैं, वो सेहत के प्रति सजग हैं. खंडवा के किसान ने भी यही किया है. वह खुद जैविक विधि से गेहूं उगाते हैं और प्रोसेसिंग, पैकेजिंग कर बेचते हैं. आलम ये है कि अब तो फसल उगने के पहले लोग बुकिंग करा लेते हैं. पढ़ें पूरी खबर…

Khandwa News: खंडवा के अहमदपुर खेगांव क्षेत्र के किसान अब जैविक खेती में नई पहचान बना रहे हैं. इन्हीं में से एक किसान ललित शंकर पाटिल ने बिना केमिकल के गेहूं उगाकर खुद का ब्रांड तैयार कर लिया है. उनकी इस पहल से गांव से लेकर शहर तक लोग प्रभावित हो रहे हैं. ललित शंकर 6 साल से लगातार जैविक खेती कर रहे हैं. उन्होंने तय किया कि अब खेत में किसी भी तरह का जहरीला केमिकल इस्तेमाल नहीं करेंगे. तब से वे सिर्फ प्राकृतिक तरीकों से खेती कर रहे हैं.

‘नमो प्रकृति खेती’ नाम से ब्रांड
किसान ने अपने गेहूं को ‘नमो प्रकृति खेती’ नाम से ब्रांड बनाकर बेचना शुरू किया है. वे खुद ही गेहूं की सफाई, प्रोसेसिंग और पैकिंग करते हैं. अब वे इसे बड़े स्तर पर बाजार में उतारने की तैयारी कर रहे हैं. उनका जैविक गेहूं बाजार में करीब 45 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रहा है. यानी 4500 से 5000 रुपए क्विंटल तक कीमत मिल रही है. खास बात ये कि कई बार इनकी फसल पहले ही बुक हो जाती है.

गोबर खाद, जीवामृत और गौमूत्र का इस्तेमाल
किसान अपने खेत में गोबर खाद, जीवामृत और गौमूत्र का इस्तेमाल करते हैं. फसल को बीमारी से बचाने के लिए नीम तेल का उपयोग किया जाता है. इससे गेहूं पूरी तरह प्राकृतिक और जहरमुक्त तैयार होता है. किसान का दावा है कि उनका गेहूं स्वाद में बेहतर है. इसकी रोटियां सुबह बनाने के बाद भी शाम तक मुलायम रहती हैं. इसी वजह से जो ग्राहक एक बार लेता है, वह दोबारा इसी गेहूं की मांग करता है.

पैकिंग में भी अपनाया देसी तरीका
किसान गेहूं की पैकिंग में मिर्च और नीम की पत्तियां डालते हैं. इससे अनाज में कीड़े नहीं लगते और किसी तरह की दवा डालने की जरूरत नहीं पड़ती. यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक है. किसान शुरुआत में अपने गेहूं को सीमित मात्रा में ही ग्राहकों को देते थे. वे खुद कहते हैं कि पहले ट्राय करो, पसंद आए तो ही आगे लो. अब स्थिति यह है कि ग्राहक पहले से बुकिंग कर रहे हैं.

*कम पढ़ाई, लेकिन बड़ा काम
सिर्फ 12वीं पास ललित शंकर पाटिल ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है. उन्होंने साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो तो खेती भी बड़ा बिजनेस बन सकती है. खंडवा का यह किसान दिखा रहा है कि जैविक खेती न सिर्फ सेहत के लिए बेहतर है, बल्कि इससे अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है. अब उनका जहरमुक्त गेहूं लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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