रीवा के राजा का गुप्त हथियार, अंग्रेज भी खाते थे खौफ, लिखते-लिखते करता था वार!

रीवा के राजा का गुप्त हथियार, अंग्रेज भी खाते थे खौफ, लिखते-लिखते करता था वार!


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रीवा विरासत के राजा के पास कई दुर्लभ हथियार थे.आज भी इन हथियारों को सहेज कर रीवा किले में बघेला म्यूजियम में रखा गया है. इन हथियारों में एक गुप्त हथियार अब भी संरक्षित है. इसकी खासियत जानने के बाद आज भी लोग हैरान रह जाते हैं.

रीवा विरासत के राजा के पास कई दुर्लभ हथियार थे. आज भी इन हथियारों को सहेज कर रीवा किले में बघेला म्यूजियम में रखा गया है. इन हथियारों में एक गुप्त हथियार भी संरक्षित है. इसकी खासियत जानने के बाद भी लोग हैरान रह जाते हैं. प्रदेश के रीवा का बघेला म्यूजियम अपने आप में ऐतिहासिक धरोहर और विरासत को संजोए है. बघेल राजवंश से जुड़े राजा, महाराजा, युवराज और राजपरिवार की नायब वस्तुओं का संग्रह यहां पर देखने को मिलता है.

रीवा किला में एक नायब वस्तु पेन पिस्टल थी. यह बिल्कुल पेन की तरह दिखती है, लेकिन इस पेन से लिखने के अलावा फायरिंग भी की जा सकती है. इसलिए इसे पेन पिस्टल कहा जाता है. इस पेन पिस्टल से एक बार लोड करने के बाद छः बार फायर किया जा सकता है.रीवा के इतिहासकार असद खान बताते हैं कि पेन पिस्टल महाराजा गुलाब सिंह की थी. वह कहीं भी जाते थे तो इस पेन पिस्टल को हमेशा अपने साथ रखते थे. इस पेन से लिखने का कार्य किया करते थे. आत्मरक्षा के लिए पेन के साथ साथ इसका काम फायरिंग भी था.

राजा के पास था गुप्त हथियार
इतिहासकार असद खान बताते हैं कि पेन पिस्टल रीवा रियासत के गुप्त हथियार में शुमार थी. उस दौरान पेन में बंदूक यह सोचना किसी के लिए मुमकिन नहीं था. यह अनोखा कारनामा भी रीवा के कुशल कारीगरों ने किया था. इस पिस्टल से छः फायर किये जा सकते थे. इसका वजन पिस्टल की तुलना में कम था. इस पेन पिस्टल से आसानी से निशाना लगाया जा सकता था. इसमें इतनी ताकत थी कि इसके एक फायर से किसी भी व्यक्ति जान ली जा सकती थी. जब रीवा रियासत के तत्कालीन महाराजा गुलाब सिंह जूदेव को इंग्लैंड के एक शाही दरबार में बुलाया गया, तो यह शर्त रखी गई थी कि दरबार में किसी भी राजा-महाराजा कोई हथियार लेकर न आए. ऐसे में रीवा रियासत के महाराज ने इस गुप्त पेन पिस्टल का इस्तेमाल किया था. महाराज के इस हथियार की देशभर में सराहना की गई थी. इंग्लैंड के शासक ने इसे प्राप्त करने का बहुत प्रयास किया. वो इस पेन पिस्टल को रीवा से ले नहीं जा सका.

बघेला म्यूजियम में 2008-2009 में हुई थी डकैती
इतिहासकार असद खान ने बताया कि रीवा के बघेला म्यूजियम में 2008-2009 के दरमियान डकैती हुई थी जिसमें चोर इस नायब वस्तु पेन पिस्टल को चुरा ले गए थे. पुलिस की कडी मशक्कत के बाद इसे दोबारा प्राप्त किया गया. जिसे बघेला म्यूजियम से अलग किसी सरकारी जगह पर सुरक्षित रखा गया है, कानूनी प्रकिया के बाद फिर से रीवा के बघेला संग्रहालय में रखा जाएगा.पेन पिस्टल के अलावा रीवा रियासत के महाराज के पास एक ऐसी मशीन गन थी, जिसे एक बार लोड करने पर 500 फायर होते थे. इस बंदूक को अमेरिका की एक कंपनी ने विशेष रीवा राजा के लिए बनाया था. आज भी यह बंदूक रीवा किले के बघेला म्यूजियम में रखी है. समय-समय पर इसकी रिपेयरिंग भी की जाती है. इस बंदूक का नाम 45 ऑटोमेटिक कोल्ड मशीन गन था. रीवा के राजा गुलाब सिंह ने इसका नाम टोमी गन रखा था.



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