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Rewa Sabji Mandi: रीवा की करहिया सब्जी मंडी आज भी सब्जी और फल व्यापारियों का सबसे बड़ा बाजार मानी जाती है. रोज यहां लाखों की खरीद-फरोख्त होती है और डिमांड इतनी की दूसरे राज्यों से भी लोग यहां सब्जियां खरीदने आते हैं. रीवा की पुरानी मंडी के पुराने दुकानदार भी मानते हैं कि समय बदल गया है. अब पुरानी मंडी की ज्यादातर सब्जियां भी करहिया मंडी से ही होकर गुजरती हैं.
रीवा: सुबह के 4 बजते ही रीवा की करहिया सब्जी मंडी जाग उठती है. घुप्प अंधेरे में जब शहर अभी नींद से जागने की तैयारी भी नहीं करता, तब मंडी के गेट खुलते ही अंदर ताजी सब्जियों की कतारें सज चुकी होती हैं. ट्रकों से उतरती टोकनियां, बोरी में भरी सब्जियां, और किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक – यही नजारा रोज इस मंडी को रीवा की आर्थिक धड़कन बना देता है. रीवा की पुरानी मंडी के पुराने दुकानदार भी मानते हैं कि समय बदल गया है. अब पुरानी मंडी की ज्यादातर सब्जियां भी करहिया मंडी से ही होकर गुजरती हैं.
करहिया सब्जी मंडी आज सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि पूरे इलाके के फल और सब्जी व्यापार की सबसे बड़ी धुरी बन चुकी है. 18 करोड़ की लागत से 35 एकड़ में बनी इस नई मंडी में सब्जी विक्रेताओं के लिए 22 शॉप कम फ्लैट (एससीएफ) और 36 छोटे बूथ बनाए गए हैं. 7-8 साल पहले शुरू हुई यह मंडी अब पूरे रीवा की सबसे बड़ी और सबसे व्यस्त सब्जी मंडी के रूप में पहचानी जाती है. आम के सीजन में तो यहां कई ट्रक आम की अलग-अलग वैरायटी एक साथ उतरती हैं और दिन खत्म होने से पहले ही उनकी पूरी खपत हो जाती है.
आपके सोकर उठने के पहले, लाखों की बिक्री
सुबह की पहली रोशनी से पहले ही यहां लाखों रुपये की खरीद-फरोख्त हो चुकी होती है. जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ता है, मंडी की रौनक भी बढ़ती जाती है. बोली लगाने की आवाजें पूरे परिसर में गूंजने लगती हैं – यही बोली थोक व्यापार की असली पहचान है. छोटे व्यापारी, ठेले वाले और रिटेल दुकानदार यहीं से माल उठाकर पूरे शहर और आसपास के इलाकों तक सब्जियां पहुंचाते हैं. रोजाना यहां लगभग 500 से ज्यादा लोग सब्जियां बेचने और खरीदने के लिए पहुंचते हैं, जबकि हजारों खरीदार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें इसी मंडी से पूरी करते हैं.
दूर-दूर से आते हैं व्यापारी
करहिया मंडी की पहचान सिर्फ रीवा तक सीमित नहीं रही. सब्जी मंडी के व्यापारी जे. पी. कुशवाहा बताते हैं कि यहां रीवा के साथ-साथ सतना, सीधी, सिंगरौली तक के किसान और व्यापारी सब्जियां लेकर आते हैं. मंडी में खपत इतनी ज्यादा है कि हर किसी को अच्छी बिक्री मिल जाती है. यही वजह है कि यहां महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार से भी सब्जियां मंगाई जाती हैं, जो सीधे थोक बाजार में उतरती हैं और कुछ ही घंटों में शहर की थालियों तक पहुंच जाती हैं.
शहर की आर्थिक धड़कन
करहिया सब्जी मंडी आज रीवा के लिए सिर्फ सब्जियों का आदान-प्रदान करने की जगह नहीं रही. यह शहर की नब्ज है, जहां से रोज हजारों घरों की रसोई चलती है, किसानों की मेहनत की कीमत तय होती है और व्यापारियों का भविष्य आकार लेता है. यहां की सुबह की भागदौड़, ताजी सब्जियों की खुशबू, बोली की आवाजें और पीढ़ियों से जुड़े रिश्ते – सब मिलकर इस मंडी को एक ऐसी जगह बना देते हैं, जो रीवा की आर्थिक धड़कन होने के साथ-साथ लोगों की यादों और भावनाओं का भी अटूट हिस्सा बन चुकी है.
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विभांशु द्विवेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के रहने वाले हैं. पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. पॉलिटिक…और पढ़ें