डेली कॉलेज में आंतरिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है। गुरुवार को बड़ी संख्या में पूर्व छात्र (ओल्ड डेलियन्स) कॉलेज के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और बायलॉज (संविधान) में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने वर्तमान प्रबंधन पर नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संस्था की वर्तमान प्रबंधन समिति का कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद अब तक नए चुनाव नहीं कराए गए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग अपनी कुर्सी बचाने के लिए नियमों में मनमाने संशोधन कर रहे हैं, जो कॉलेज की परंपराओं और स्थापित प्रक्रियाओं के खिलाफ है। प्राचार्य से मुलाकात को लेकर तनाव प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब पूर्व छात्रों को प्राचार्य डॉ. बिंद्रा से मिलने से रोक दिया गया। इस पर काफी देर तक बहस और विरोध हुआ। बाद में प्रबंधन ने उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति दी। मुलाकात के दौरान प्राचार्य ने उनकी बात सुनी और मुद्दों को प्रबंधन के समक्ष रखने का आश्वासन दिया। वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल पूर्व छात्रों ने केवल संविधान संशोधन ही नहीं, बल्कि संस्थान की गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिना वार्षिक साधारण सभा (AGM) बुलाए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं और पूर्व छात्रों की भागीदारी लगातार कम की जा रही है। साथ ही, अनावश्यक शिकायतों और एफआईआर से कॉलेज की राष्ट्रीय स्तर पर छवि प्रभावित हो रही है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी प्रदर्शन में मधुकांत गर्ग, डॉ. सुमित शुक्ला, देवाशीष मजूमदार, कमलेश कासलीवाल, विक्रम खंडेलवाल और नीरज देसाई सहित कई पूर्व छात्र शामिल हुए। ज्ञापन सौंपने के बाद उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और प्रस्तावित बदलावों पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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