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Nari Shakti Vandan Adhiniyam: देश की संसद से लेकर प्रदेश की विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मोदी सरकार लागू करने जा रही है. जिसके बाद महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा. इसको लेकर मोदी सरकार सदन में 16 अप्रैल से विशेष सत्र बुला रही है. अब इस बिल को लेकर सुनिए महिलाओं की जुबानी आखिर कैसे बदलेगी तस्वीर.
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रविंद्र भवन में बुधवार को महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी. इस दौरान मौका था केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजना नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर हर क्षेत्र की महिलाओं से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बातचीत का खास मौका. मोदी सरकार 16 अप्रैल से बुलाए गए खास संसद सत्र में राजनीति में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने जा रही है. जिसके ठीक पहले प्रदेश की मोहन सरकार ने महिलाओं को इस बिल के बारे में बताया. अब आखिर कैसे बदलेगी नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाओं की तकदीर और आखिर क्यों महिलाओं ने कहा, इस बिल को तो काफी पहले आ जाना चाहिए था.
महिलाओं के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम
केंद्र की मोदी सरकार 16 अप्रैल से संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को लागू करने जा रही है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भोपाल में पेशे से प्रोफेसर डॉ. प्रीति महेश्वरी कहती हैं कि, ये एक बहुत ही सम्मानपूर्ण कदम है महिलाओं के लिए. इस 33% आरक्षण से वो अपने आप को सिद्ध कर पाएंगी और अपनी पूरी क्षमता को बता पाएंगी. वो कहती हैं कि, इस बिल की बहुत जरूरत थी महिलाओं कहीं थोड़ा पीछे हैं आज भी तो उनको यह 33% आरक्षण के साथ और अच्छे से आगे बढ़ा पाएंगी.
ये महिलाओं के लिए ऐतिहासिक पल
अखिल भारतीय लोधी महासभा की महिला प्रदेश अध्यक्ष कमलेश वर्मा ने केंद्र के नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल को लेकर कहा कि, ये बिल हम सभी नारी शक्ति के लिए बहुत ऐतिहासिक पल है. इसके लिए मैं हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत-बहुत आभार, धन्यवाद कहती हूं. वो आगे कहती हैं कि, चूकिं इस देश की आधी आबादी नारी शक्ति है. अब इस आधी आबादी को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है और निर्णय करने का मौका मिला है. जिससे हमारा भारत सशक्त होगा, समृद्ध होगा, शक्तिशाली होगा. इस बिल से तस्वीर, तकदीर और दिशा बदलेगी.
संसद में महिला आरक्षण है पहला कदम
भोपाल में असिस्टेंट प्रोफेसर सीमा कीर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बात करते हुए कहती हैं कि सबसे पहला कदम तो यही था कि महिलाओं को संसद और विधानसभा में आरक्षण मिलना चाहिए, भविष्य में और उम्मीद है. महिला आरक्षण बिल को लेकर डॉ. रश्मि कहती हैं कि, मैं तो ये कहूंगी की 33% से ज्यादा आरक्षण होना था. वो आगे बताती हैं कि, ये आरक्षण कम ही है क्योंकि अभी भी कई जगह महिलाओं की स्थिति दयनीय है तो उसको उठाने के लिए हमें ये परसेंट तो बढ़ाना ही पड़ेगा.