50°C तापमान में भी रोजाना बाल्टी भर-भरकर दूध देती यह भारतीय नस्ल की गाय

50°C तापमान में भी रोजाना बाल्टी भर-भरकर दूध देती यह भारतीय नस्ल की गाय


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50°C तापमान में भी रोजाना बाल्टी भर-भरकर दूध देती यह भारतीय नस्ल की गाय

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Tharparkar breed cattle specialty: देश भर में गायों की 52 ब्रीड को 21 गोकुल ग्राम में संधारण किया जा रहा है. एमपी के इकलौते सागर के रतौना में स्थित ब्रीड संधारण केंद्र पर थारपारकर प्रजाति 1946 से है. वर्तमान समय में इनकी संख्या 245 है. यह मध्य प्रदेश का एकमात्र गोकुल ग्राम है. इस गाय पर गर्मी का बहुत कम असर होता है और यह अपने दुग्ध काल में लगभग 3500 से लेकर 4000 लीटर तक दूध देती है.

सागर. ग्लोबल वार्मिंग चेंज की वजह से बुंदेलखंड में गर्मी के मौसम में तापमान 46-47 डिग्री तक पहुंच जाता है. एक तरफ जहां इंसान ऐसे मौसम में घरों में दुबक जाते हैं तो दूसरी तरफ दुधारू पशुओं में दुग्ध उत्पादन की मात्रा 30 से 40% तक काम हो जाती है. वे ऐसे मौसम में सरवाइव कम कर पाते हैं. लेकिन एक भारतीय नस्ल की ऐसी गाय होती है जिस पर गर्मी के मौसम का बहुत कम असर होता है, यहां तक कि वह 50 डिग्री से अधिक तापमान में न सिर्फ रह सकती हैं, बल्कि ना तो इस पर कोई बीमारी होगी और ना ही इसकी दूध उत्पादन पर कोई असर पड़ेगा लेकिन इसके लिए गर्मी के मौसम के हिसाब से कुछ मैनेजमेंट करने की भी जरूरत होती है. इसी भारतीय नस्ल की एक गाय राजस्थान के सूरतगढ़ में 9 लाख 47000 रुपए में अकोला के किसान के द्वारा खरीदी गई है.

थारपारकर प्रजाति गाय की खास बात यह होती है कि इनका रंग सफेद होता है और लगभग सभी गाय एक जैसी दिखाई देती हैं. यह अपने दुग्ध काल में लगभग 3500 से लेकर 4000 लीटर तक दूध देती है. इसके साथ अगर इनको अच्छा पोषण मिलता रहे तो यह है और भी ज्यादा हो जाता है. गर्मी के मौसम में भी इनको बीमारी कम होती है क्योंकि इनमें इम्युनिटी पावर ज्यादा होता है और यह हर तरह के मौसम को अडॉप्ट करने की क्षमता रखती हैं या उसको अपने अनुकूल बना लेती हैं. इनकी स्किन भी पतली होती है और रोम भी छोटे-छोटे होते हैं

गाय को स्वस्थ रखने के लिए करने पड़ेंगे ये काम
गोकुल ग्राम की प्रबंधक डॉक्टर राकेश गौतम बताते हैं कि थारपारकर मूलतः राजस्थान के सूरतगढ़, श्रीगंगानगर, जैसलमेर की तरफ ट्रैकिंग भारतीय नस्ल में यह पशु पाया जाता है, गोकुल ग्राम पशु संधारण केंद्र सागर की स्थापना 1946 में हुई तब से इसका संधारण यहां पर किया जा रहा है, इसके कुछ विशेष गुण होते हैं जिससे उत्पादन और हिप प्रोडक्शन कहते हैं दोनों ब्रीडिंग टेक्ट है जो उसके लिए अनुकुलता बनाते हैं वह इस क्षेत्र में अच्छे से संधारित की जा रही है.

गर्मी के मौसम में जो पशु को रखने का सिद्धांत है, उसमें एक वेंटिलेशन प्रॉपर हो और जो सेंड होता है, वह ऐसा हो जिसमें हवा और प्रकाश दोनों का आवागमन हो सके. इसके अलावा वहां पर पानी का जमाव नहीं होना चाहिए, इसके अलावा जो गोमूत्र और गोबर का डिस्पोजल हम लोग करते हैं तो वह इतनी दूरी पर हो कि कोई दूसरा कृमि का प्रकोप नहीं हो, गर्मी के मौसम में पशु को ठंडा वातावरण उपलब्ध कराना होगा. तो इसमें कूलिंग फैन लगा सकते हैं. प्रॉपर वेंटिलेशन के साथ सीधी गर्म हवा सेट में ना आए आसपास वृक्षारोपण भी कर दें.

छोटे बच्चों को भी पिला सकते हैं दूध
मुख्य रूप से यह नस्ल राजस्थान की है इसलिए उस हिसाब से यह अनुकुलत लेती हैं, जो टेंपरेचर की एडेप्टेबिलिटी है कोल्ड वेदर में 15 डिग्री तक तापमान हो जाता है गर्मी के मौसम में अधिकतम 4950 तक पहुंच जाता है ऐसी स्थिति में पशु अपना एडॉप्शन ले लेता है.

इसके दूध को लेकर भी कुछ वैज्ञानिक तथ्य देखे गए हैं. गाय जानने के बाद जो कोलस्ट्रम निकलता है जिसको हम खीस कहते हैं, इसमें इमोनिगामा ग्लोबिन का प्रकाशन होता है सामान्य पशुओं की अपेक्षाकृत ज्यादा होता है और इसका जो फैट ग्लोबल का साइज होता है, वह मिनिमम होता है. थारपारकर गोवंश यह पशु का दूध हम बकरी के दूध की तरह पतला करके छोटे-छोटे बच्चों को भी दे सकते हैं, यह अपच नहीं होता है.

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Mohd Majid

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