MP में 100 से ज्यादा गांव के किसान सरकार को नहीं बेचते गेहूं, कमाई का निकाला दूसरा रास्ता

MP में 100 से ज्यादा गांव के किसान सरकार को नहीं बेचते गेहूं, कमाई का निकाला दूसरा रास्ता


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MP Wheat Procurement: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 100 से भी अधिक गांव के किसान गेहूं की खेती तो करते हैं पर सरकारी रेट पर गेहूं नहीं बेचते. उन्होंने गेहूं बेचने का दूसरा रास्ता निकाला है. साथ कमाई भी दूसरे अंदाज में कर रहे हैं. जानें…

Chhatarpur News: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी शुरू कर दी गई है.‌ छतरपुर जिले में भी हर साल गेहूं खरीदी की जाती है. लेकिन, जिले में 100 से ज्यादा गांवों के ऐसे किसान भी हैं, जिन्होंने आज तक सरकारी खरीद में गेहूं नहीं बेचा है. किसान रामेश्वर पाल ने लोकल 18 से बताया, बारीगढ़ और गौरिहार क्षेत्र के 100 से भी ज्यादा गांवों के किसान आज भी सरकारी गेहूं खरीदी में अपना गेहूं बेचने नहीं जाते हैं.

दरअसल, हमारे यहां चाहे गेहूं की बुवाई करें या चना, मसूर, सरसों की. सभी फसलों की पैदावार बराबर होती है. छोटे किसान ज्यादातर चना, मसूर और सरसों की खेती करते हैं. क्योंकि, चना, मसूर, सरसों का रेट गेहूं से कहीं ज्यादा है. हालांकि, बड़े किसान गेहूं की खेती करते हैं. लेकिन, वह सरकारी मंडी में बेचने नहीं जाते. वे भी नजदीकी हाट-बाजार के व्यापारियों को अपना गेहूं सरकारी रेट से ज्यादा में बेचते हैं.

100 क्विंटल वाले भी नहीं जाते बेचने
किसान सीताराम शुक्ला बताते हैं कि जब से गरीब लोगों को फ्री अनाज मिलने लगा है, तब से छोटे किसानों की गेहूं की फसल में रुचि कम हो गई है. लोग गेहूं से ज्यादा चना, मसूर और सरसों की खेती करते हैं. हमारे यहां ऐसे किसान भी हैं, जिनके पास बोरिंग की सुविधा है. उनके यहां 50 से 100 क्विंटल गेहूं उत्पादन होता है, लेकिन वो भी गेहूं की सरकारी खरीद में दिलचस्पी नहीं दिखाते. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि सरकारी मंडी से ज्यादा भाव खुले बाजार में मिल जाता है.

सरकारी रेट से ज्यादा भाव बाजार में
किसान देवीदीन बताते हैं कि गेहूं के समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव तो मंडी में मिल जाता है. 1 महीने पहले ही हमने गेहूं बेचा था, जिसका रेट हमें 3 हजार रुपए क्विंटल मिला था. खुले मार्केट में सरकारी रेट से ज्यादा गेहूं का रेट रहता है, इसलिए किसानों ने समर्थन मूल्य पंजीयन में भी रुचि नहीं दिखाई. हमनें पिछली बार भी सरकारी पंजीयन में नहीं बेचा था. हम किसान भाइयों को नकद की जरूरत होती है, इसलिए खुले बाजार में व्यापारियों को ही बेच लेते हैं.

3000 से ज्यादा दे रहे व्यापारी
वहीं कालीचरण सोनी बताते हैं कि हमारे क्षेत्र में नहर की सुविधा नहीं है. ज्यादातर किसान भगवान भरोसे हैं. उत्पादन 2 क्विंटल का बीघा ही निकलता है, इसलिए गेहूं कम लगाते हैं और दूसरी फसलें ज्यादा लगाते हैं. अन्य किसान बताते हैं कि व्यापारी समर्थन मूल्य से ज्यादा ही ले रहे हैं और पैसा भी नकद मिल जाता है, इसलिए किसान सरकारी खरीद में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. अभी 1 महीने पहले ही व्यापारियों को गेहूं बेचा था तो उसमें 3,070 रुपए प्रति क्विंटल भाव मिला था, जबकि समर्थन मूल्य 2600 रुपए प्रति क्विंटल है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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