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शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर मध्य प्रदेश में लंबे समय से घमासान मचा हुआ है, जहां राज्य सरकार ने अब शिक्षकों को राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है. अब सभी की निगाहें कोर्ट के फैसले के ऊपर टिकी हुई हैं. शिक्षकों ने इस परीक्षा का खूब विरोध किया है.
TET के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची मध्य प्रदेश सरकार (AI सरकार)
मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षकों को राहत देने की ठान ली है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सरकार प्रदेश में टीईटी (Teacher Eligibility Test) परीक्षा करवाए और इसमें फेल होने वाले को हटा दे. इसके बाद प्रदेश में कई जगह शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला. अब सरकार ने शिक्षकों के लिए TET परीक्षा अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है. इससे शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद बंधी है.
TET से जुड़े तकनीकी पहलुओं के चलते कई शिक्षकों की पात्रता और उनकी सेवाओं पर सवाल खड़े हो गए थे. इस स्थिति ने बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रभावित किया, जो लंबे समय से समाधान की मांग कर रहे थे. अब मध्य प्रदेश शासन की ओर से याचिका 17 अप्रैल को शाम 4 बजे सुप्रीम कोर्ट में ई-फाइलिंग के जरिए दाखिल की गई है. इस रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति साफ हो सकेगी.
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार का यह फैसला सकारात्मक है और इससे प्रभावित शिक्षकों को न्याय मिलने की उम्मीद है. फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद में अहम भूमिका निभाएगा.
TET परीक्षा के लिए क्या आदेश हुआ था जारी?
स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश में बताया गया था कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले हुई है. ऐसे शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा. जिन शिक्षकों की 5 साल से कम नौकरी बची है. उन्हें TET परीक्षा देने की जरूरत नहीं है. वहीं ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी. आदेश जारी होने के 2 साल के भीतर किसी भी शिक्षक को TET परीक्षा पास करनी होगी. आदेश जारी होने के बाद इसका खूब विरोध हुआ था.