बड़वानी में गेहूं खरीदी केंद्र पर हो रही परेशानी: 180 ने कराया स्लॉट बुक, 4 किसानों की हुई बुकिंग – Barwani News

बड़वानी में गेहूं खरीदी केंद्र पर हो रही परेशानी:  180 ने कराया स्लॉट बुक, 4 किसानों की हुई बुकिंग – Barwani News




बड़वानी जिले के बोरलाई स्थित बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में दिक्कतें सामने आई हैं। यहां करीब 180 किसानों ने अपने गेहूं का पंजीयन कराया था, लेकिन अब तक केवल 4 किसानों के ही स्लॉट बुक हो पाए हैं। शेष 176 किसान स्लॉट बुकिंग का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि पटवारी द्वारा सर्वे और गिरदावरी के बाद पंजीयन तो हो गया, लेकिन स्लॉट बुकिंग में लगातार तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इससे उन्हें अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेचने में परेशानी हो रही है। गांव की बुजुर्ग महिला किसान कुसुम बाई ने बताया कि उनका गेहूं खुले में रखा हुआ है और घर में रखने की जगह नहीं है। बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान होने का खतरा बना हुआ है। किसानों के सामने यह मजबूरी है कि यदि वे व्यापारियों को गेहूं बेचते हैं, तो उन्हें 20 से 22 रुपए प्रति किलो के हिसाब से ही कीमत मिल रही है। जबकि सरकार का समर्थन मूल्य बोनस सहित करीब 2625 रुपए प्रति क्विंटल है, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। समिति के सहायक प्रबंधक विक्की यादव ने बताया कि सैटेलाइट मैपिंग में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है और अगले 2 से 3 दिनों में समस्या के समाधान का आश्वासन दिया जा रहा है। हालांकि, किसान इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। ग्राम बोरलाय के किसान हरिकेश पाटीदार ने कहा कि प्रबंधक ने बताया कि सैटेलाइट मैपिंग में उनका खेत नहीं आ रहा है, इसलिए स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा है। किसानों का आरोप है कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी गड़बड़ी है, जिसके कारण उन्हें समय पर अपनी फसल बेचने में परेशानी हो रही है और उन्हें व्यापारियों को कम दाम पर गेहूं बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। किसान जयदेव ने बताया कि स्लॉट बुक नहीं होने के कारण उन्हें बार-बार खरीदी केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। समय पर खरीदी नहीं होने से आर्थिक परेशानी बढ़ रही है। पैसों की जरूरत है लेकिन स्लॉट बुकिंग में देरी के कारण वे फसल नहीं बेच पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें अपनी उपज व्यापारियों को कम दाम पर बेचने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के स्लॉट पहले बुक हो रहे हैं, जिससे अन्य किसान परेशान हैं।



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