Last Updated:
बालाघाट की सुलोचना का जीवन अच्छा चल रहा था फिर कोरोना के कहर ने पति का सहारा छीन लिया. खुद सिलाई कढ़ाई का काम करती थी लेकिन सिर्फ शौकिया तौर पर लेकिन वक्त ऐसा बदला कि उन्हें अपने शौक को प्रोफेसन में बदलना पड़ा. आज वह आत्मनिर्भरता के साथ दूसरों को रोजगार दे रही हैं..
बालाघाट की मार्डिकर गली और उसमें भी एक एक छोटी सी चॉल, जहां पर सुलोचना परिहार और उनकी सहेलियां अपना बुटीक चलाती हैं. सुलोचना खुद सिलाई कढ़ाई का काम करती थी लेकिन सिर्फ शौकिया तौर पर लेकिन वक्त ऐसा बदला कि उन्हें अपने शौक को प्रोफेशन में बदलना पड़ा. लेकिन क्यों इससे पहले आपको उनके जीवन के बारे में जानना चाहिए. जब उनके पति थे तो जीवन अच्छा चल रहा था लेकिन कोरोना काल आया, जिसने एक नहीं बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी. उन्हीं में से एक है सुलोचना का परिवार, जो पति की मौत के बाद टूट सी गई थी.
45 साल की सुलोचना अपने हुनर से तो परिवार के खर्च में अपना योगदान तो देती थी. उनके पति भी अपना व्यवसाय चलाते थे लेकिन किस्मत ऐसी की कोरोना के कहर ने पति का सहारा छीन लिया. ऐसे में इस हादसे ने उन्हें अंदर से हिला दिया. उस समय उनकी आर्थिक स्थित ठीक न थी. लेकिन पति के निधन पर मिली 50 हजार रुपए की मदद ने थोड़ी सी राहत जरूर दी.
लेकिन वक्त टूटने का न था. बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च की जिम्मेदारी उनके सिर पर थी. ऐसे में उन्होंने अपने दुखों को नजरअंदाज किया और अपने हुनर पर उन्हें भरोसा था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अकेले शुरू किया कारवा जब आगे बढ़ा तो आज वह बिजनेस में बदल गया.
अब बच्चों के सपने पूरे करना बाकी
सुलोचना एक पढ़ी लिखी महिला है. उन्होंने समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और उसी के साथ पीजीडीसीए की पढ़ाई भी की है. अपने बेटे की शिक्षा को लेकर भी सुलोचना बेहद सजग हैं. उनका बेटा नागपुर के कॉलेज से एमसीए की पढ़ाई कर रहा है. वहीं, उनकी बेटी श्रद्धा का सपना खुद पीएचडी करने का है, जिसके लिए भाई ने उसकी जिम्मेदारी लेने का फैसला किया है.
आत्मनिर्भरता के साथ दूसरों को दे रही रोजगार
सुलोचना ने दो सिलाई मशीनों से शुरुआत की थी फिर धीरे-धीरे काम आगे बढ़ा. सुलोचना ब्लाउज, लहंगा, सलवार सूट, फ्रॉक और डिजाइनर ड्रेस तैयार कर अपनी पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने 30 से 40 लोगों को कढ़ाई बुनाई की ट्रेनिंग भी दी है. वहीं, अब 11 महिलाओं को रोजगार भी दे रही है. हर माह लगभग 50 से 60 हजार रुपए की कमाई कर रही है. सुलोचना की कहानी सशक्त नारी के उदाहरण को बिल्कुल जस्टिफाई करती है. वह अब सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है. उन्होंने न सिर्फ हालातों को मात दी बल्कि विषम परिस्थिति में जिंदगी जीने की प्रेरणा भी दी है.
About the Author
with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें