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Guna Crime News: गुना पुलिस लाइन परिसर में हुए अंधे कत्ल को सुलझाने में कैंट पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. कोर्ट में जब चश्मदीद गवाह अपने बयानों से मुकर गए, तब फॉरेंसिक रिपोर्ट संजीवनी बनकर आई.
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Guna News: राजनीतिक बहस किस हद तक जा सकती है, इसका खतरनाक अंजाम गुना में देखने में आया है. बात इतनी बढ़ी की दो मामाओं ने मिलकर अपने ही भांजे की हत्या कर दी. अदालत ने इस रूह कंपा देने वाले मामले में ऐतिहासिक न्याय किया है. अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्र की कोर्ट ने महज 5 महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा दी.
जानकारी के अनुसार, बिहार के शिवहर जिले के रहने वाले राजेश मांझी और तूफानी मांझी, जो जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कट्टर समर्थक थे, अपने भांजे शंकर मांझी के साथ गुना में मजदूरी कर रहे थे. शंकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और तेजस्वी यादव का समर्थक था. 16 नवंबर की रात पुलिस लाइन परिसर में भोजन और शराब के दौरान बिहार चुनाव के नतीजों पर चर्चा शुरू हुई. तेजस्वी यादव के पक्ष में बोलने पर दोनों मामा इस कदर आगबबूला हुए कि उन्होंने अपने ही भांजे को मौत के घाट उतारने की साजिश रच डाली.
कीचड़ में घोंटा दम, नाखूनों ने उगला सच
राजनीतिक बहस के दौरान मामाओं ने पहले शंकर को बुरी तरह पीटा और फिर उसे जमीन पर गिराकर उसका मुंह पास ही जमा कीचड़ और गंदे पानी में जबरन दबा दिया. दम घुटने के कारण शंकर की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई. इस अंधे कत्ल को सुलझाने में कैंट पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई. कोर्ट में जब चश्मदीद गवाह अपने बयानों से मुकर गए, तब फॉरेंसिक रिपोर्ट संजीवनी बनकर आई. दरअसल, संघर्ष के दौरान आरोपियों के नाखूनों में मृतक के गले की चमड़ी के अवशेष फंस गए थे. फॉरेंसिक रिपोर्ट ने वैज्ञानिक प्रमाण दिया कि शंकर की मौत के वक्त दोनों मामा ही उसके हत्यारे थे.
त्वरित न्याय की मिसाल
अदालत ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 24 जनवरी से निरंतर सुनवाई की और महज 150 दिनों के भीतर फैसला सुना दिया. कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि राजनीतिक विरोध की आड़ में इस तरह की नृशंसता समाज के लिए घातक है. दोनों दोषियों, तूफानी और राजेश को आजीवन कारावास के साथ-साथ अर्थदंड की सजा दी गई. गुना पुलिस की 40 दिनों के भीतर चालान पेश करने की मुस्तैदी और न्यायालय के त्वरित फैसले ने न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास और सुदृढ़ किया है.
निर्माणाधीन क्वार्टर में मजदूरी कर रहे थे
जिला लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने कहा, घटना 16 नवंबर 25 की रात की है. कैंट थानांतर्गत पुलिस लाइन में निर्माणाधीन क्वार्टर में कार्यरत तीन मजदूरों का आपस में झगड़ा हुआ. इसमें दो लोगों ने एक तीसरे साथी को कीचड़ और पानी में डूबाकर उसकी हत्या कर दी थी. विवेचना उपरांत राजेश मांझी और तूफानी मांझी दोषी पाए गए. सत्र न्यायाधीश अमिताभ मिश्रा के न्यायालय से दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई.
पुलिस टीम का सम्मान
इस प्रकरण में उत्कृष्ट कार्य कर आरोपियों को शीघ्र सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली टीम की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक हितिका वासल द्वारा सभी को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया. साथ ही पुलिस महानिरीक्षक ग्वालियर जोन अरविन्द सक्सेना द्वारा टीम को 30,000 रुपये का नकद इनाम की घोषणा की गई है.
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