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MP Board 10th Result Topper Success Story: एमपी बोर्ड 10वीं की टॉप सूची में तीसरा स्थान पाने वाले शिवम के पिता विनोद बोपचे दूसरे के खेतों में मजदूरी करते हैं. वहीं, मां भी मजदूरी करके परिवार पालने में सहयोग करती हैं. शिवम चार बहनों में अकेला भाई है. एक दिन पढ़ाते-पढ़ाते बहन ने शिवम से एक बात कही, जो उसके लिए चैलेंज हो गया…
MP Board Result: बालाघाट में कभी नक्सलावद हावी था. लेकिन, इस कलंक के मिटने के साथ ही बालाघाट अब नई इबारत लिख रहा है. एमपी बोर्ड के रिजल्ट बालाघाट का डंका बज रहा है. दरअसल, 10वीं के टॉपर्स में बालाघाट के 37 बच्चे शामिल हैं. इसमें टॉप 2 और 3 पोजिशन वाले भी बालाघाट के ही हैं. इसी लिस्ट में शिवम बोपचे का नाम भी है. आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार में जन्मे परिवार शिवम ने हैरतअंगेज रिजल्ट दिया. कटंगी तहसील के अंतर्गत आने वाले परसवाड़ा घाट के शिवम ने 500 में से 497 अंक हासिल किए हैं, जो 99.4% है. लेकिन, शिवम की कहानी सबको चौंका रही है. जानें क्यों…
माता-पिता मजदूर
एमपी बोर्ड 10वीं की टॉप सूची में तीसरा स्थान पाने वाले शिवम के पिता विनोद बोपचे दूसरे के खेतों में मजदूरी करते हैं. वहीं, मां भी मजदूरी करके परिवार पालने में सहयोग करती हैं. शिवम चार बहनों में अकेला भाई है. सभी ने बचपन से गांव के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की. वहीं, उनकी सभी बहने भी पढ़ने में अव्वल हैं. बहन ने शिवम का लगातार गाइड किया, जिससे शिवम की पढ़ाई में धार लग गई. वहीं, बहन ने उसे अच्छे अंक लाने पर 1000 रुपये इनाम देने की बात की थी. शिवम ने इसे चैलेंज की तरह लिया और खूब मेहनत की. शिवम बताते हैं कि घर पर पढ़ने के लिए माहौल था, लेकिन पढ़ाई में ज्यादा ध्यान लगे, इसके लाइब्रेरी में वह पढ़ने जाया करते हैं.
सरकारी स्कूल में पढ़ा, अब प्रोफेसर बनने की चाह
शिवम ने बताया कि वह बचपन से ही सरकारी स्कूल में ही पढ़ा है. शिवम की सफलता उन महंगे प्राइवेट स्कूलों को चिढ़ाती है, जो अपनी सुविधाओं पर इतराते हैं. शिवम को हमेशा से ही सुविधाओं का अभाव लगा, लेकिन इन बातों को उसने कमजोरी बनने न दिया. लगातार मेहनत की और आज उनकी मेहनत रंग लाई. अब वह आगे गणित संकाय से पढ़ाई करना चाहता है, लेकिन उसी स्कूल से. उसका सपना प्रोफेसर बनने का है.
स्कूल में अच्छा माहौल, लेकिन शिक्षक नहीं
शिवम का कहना है कि पहले सरकारी स्कूलों में शिक्षकों अभाव रहता था. ऐसे में समस्याओं का सामना करना पड़ा था. खासतौर से अंग्रेजी विषय में समस्या हुई. इसके पीछे वह कारण बताते हैं कि शुरुआत के समय सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी रही है. अब भी यही समस्या है. वह चाहते हैं कि गांव के सरकारी स्कूलों में भी सरकार को ध्यान देना चाहिए. कम से कम शिक्षकों की भर्ती होनी चाहिए, ताकी गांव में पढ़ने वाले बच्चों को शहर के स्कूलों में पढ़ने की आस पैदा न हो. ऐसे में गांवों के स्कूलों को बेहतर करना चाहिए.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें